US Petrol Price Increased: america aur iran ki ladai | US Iran War News- ईरान से युद्ध करके दोतरफा फंसा अमेरिका तेल के दाम बढ़ें


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ईरान युद्ध का असर अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. अमेरिका में पेट्रोल एक हफ्ते में 11% और डीजल 15% महंगा हो गया है. कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गया है. वैश्विक सप्लाई पर दबाव कम करने के लिए अमेरिका ने भारत को 30 दिन तक रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है ताकि बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहे.

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वॉशिंगटन: ईरान के साथ बढ़ते युद्ध का असर अब अमेरिका की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है. अमेरिकी लोग दोतरफा फंस गए हैं. एक तरफ ईरान से लड़ने में ही हर रोज करोड़ों डॉलर खर्च हो रहे हैं. वहीं दूसरी ओर जंग के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और अमेरिका में पेट्रोल-डीजल के दाम भी उछल गए हैं. अमेरिका में एक गैलन पेट्रोल की कीमत बढ़कर 3.32 डॉलर हो गई है. यह एक हफ्ते पहले के मुकाबले करीब 11 फीसदी ज्यादा है. वहीं डीजल की कीमत 4.33 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है, जो एक हफ्ते में करीब 15 फीसदी बढ़ोतरी है. शायद यही कारण है कि अमेरिका ने भारत को रूस से 30 दिनों तक तेल खरीदने की मंजूरी दी है. क्योंकि भारत जैसा बड़े खरीदार के ऑर्डर से तेल के दाम और भी ज्यादा बढ़ सकते हैं. अगर तेल के दाम और बढ़े तो अमेरिकी लोगों पर सीधा असर होगा, जिससे ट्रंप घरेलू मोर्चे पर घिर सकते हैं.

अमेरिका में 1 लीटर पेट्रोल का दाम कितना है?

एक गैलन करीब 3.78 लीटर होता है. यानी 3.32 डॉलर प्रति गैलन पेट्रोल का मतलब लगभग 0.88 डॉलर प्रति लीटर है. इस गणित के हिसाब से अमेरिका में पेट्रोल करीब 81 रुपये प्रति लीटर के आसपास पड़ रहा है.

तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

दरअसल अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है. फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लड़ाई और हमलों की वजह से तेल टैंकरों की आवाजाही खतरे में पड़ गई है. यही वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई गुजरती है. जैसे ही इस रास्ते पर खतरा बढ़ा, बाजार में तुरंत घबराहट फैल गई और तेल की कीमतें तेजी से चढ़ने लगीं.

नतीजा यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया. अमेरिकी कच्चा तेल 90.90 डॉलर तक पहुंच गया, जो एक हफ्ते में करीब 35 फीसदी की बड़ी छलांग है. ब्रेंट क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है. यह पिछले कई महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है.

भारत से इसीलिए मांगी मदद

इसी बढ़ते दबाव के बीच अमेरिका ने भारत से संपर्क किया है कि वह समुद्र में पड़े रूसी तेल को खरीदकर जल्दी रिफाइनरियों तक पहुंचाए. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक यह एक अस्थायी कदम है ताकि बाजार में तेल की सप्लाई बनी रहे और कीमतें और ज्यादा न उछलें. दरअसल भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूस से भारी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदता रहा है. अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदता तो वैश्विक बाजार में सप्लाई और कम हो सकती है. यही वजह है कि अमेरिका ने 30 दिन की अस्थायी छूट देकर भारत को यह तेल खरीदने की अनुमति दी है, ताकि दुनिया भर में तेल की कीमतें नियंत्रण से बाहर न हो जाएं. पहले यही रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया था.

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Yogendra Mishra

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें



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