Last Updated:
डोनाल्ड ट्रंप ने लैटिन अमेरिका समिट में कहा कि क्यूबा ‘ज़िंदगी के आखिरी पलों’ में है और बड़ा बदलाव आ रहा है. क्यूबा में ब्लैकआउट और एनर्जी संकट बढ़ रहा है. ट्रंप ने क्यूबा पर फोकस की बात कही. ट्रंप ने मार्को रुबियो को क्यूबा के अधिकारियों के साथ बातचीत करने का काम सौंपा है और आइलैंड पर ‘फ्रेंडली’ तरीके से कब्ज़ा करने का आइडिया भी दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जल्द ही क्यूबा पर कंट्रोल कर लेगा. (फाइल फोटो)
वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कई लैटिन अमेरिकी साथियों से कहा कि क्यूबा अपनी ‘ज़िंदगी के आखिरी पलों’ में है और कम्युनिस्ट राज वाले इस देश में ‘बड़ा बदलाव’ आ रहा है. ट्रंप ने फ्लोरिडा में लैटिन अमेरिका समिट में एक दर्जन नेताओं से कहा, “मैं क्यूबा का ध्यान रखूंगा.” इस समिट में हवाना के अधिकारी शामिल नहीं थे. अमेरिकी प्रेसिडेंट ने कहा, “उनके पास पैसा नहीं है, उनके पास तेल नहीं है. उनकी सोच खराब है, उनके पास एक बेकार शासन है जो लंबे समय से खराब है.” उन्होंने आगे कहा, “क्यूबा अपनी ज़िंदगी के आखिरी पलों में है.”
व्हाइट हाउस में गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी क्यूबा के लोगों का अपने देश लौटना बस ‘समय की बात’ है, जिससे यह इशारा मिलता है कि ईरान के साथ चल रहे झगड़े के बाद क्यूबा उनके एडमिनिस्ट्रेशन का अगला फोकस हो सकता है. अमेरिका के प्रेशर कैंपेन ने क्यूबा को उस कगार पर पहुंचा दिया है, जहां प्रेसिडेंट ट्रंप और रिपब्लिकन सांसदों ने कम्युनिस्ट शासन के जल्द खत्म होने का अनुमान लगाया है.
पश्चिमी क्यूबा के ज़्यादातर हिस्सों में बुधवार को बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट ने बढ़ते एनर्जी संकट को दिखाया, जो अमेरिका के फ्यूल ब्लॉकेड से और बिगड़ गया है, जिसने तेल के इंपोर्ट पर रोक लगा दी है और इसकी कमी को और बढ़ा दिया है. ‘द हिल’ के मुताबिक, एनालिस्ट के हवाले से, क्यूबा का बचा हुआ फ्यूल रिज़र्व मार्च के बीच से आखिर तक खत्म हो सकता है, जिससे आइलैंड की इकॉनमी रुक सकती है.
ट्रंप ने मार्को रुबियो को क्यूबा के अधिकारियों के साथ बातचीत करने का काम सौंपा है और आइलैंड पर ‘फ्रेंडली’ तरीके से कब्ज़ा करने का आइडिया भी दिया है. खबर है कि क्यूबा के नेता अपना वजूद बनाए रखने के लिए ऑप्शन पर सोच-विचार कर रहे हैं, जिसमें पॉसिबल इकॉनमिक रिफॉर्म, रीजनल प्रायोरिटी पर कोऑपरेशन और उन देशों के साथ रिश्ते कम करना शामिल है जिनका अमेरिका विरोध करता है.
About the Author
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें





