डायबिटीज का नसों पर क्या होता है असर? विटामिन B12 का कितना रोल, कैसे गंभीर कॉम्प्लिकेशंस से बचें


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Diabetes and Nerve Health: डायबिटीज की बीमारी हमारी नसों को डैमेज करने लगती है. अगर शुगर लेवल अनकंट्रोल रहे, तो यह डायबिटिक न्यूरोपैथी की कंडीशन पैदा कर सकता है. लंबे समय तक हाई शुगर और विटामिन B12 की कमी इस समस्या को बढ़ा सकती है. समय पर जांच, शुगर कंट्रोल और सही ट्रीटमेंट से नसों की डैमेज को रोका जा सकता है.

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डायबिटिक न्यूरोपैथी एक गंभीर कंडीशन है, जो नसों को डैमेज करती है.

Hidden Risks of Diabetes: डायबिटीज के मरीजों को लाइफ टाइम शुगर लेवल कंट्रोल करना पड़ता है, ताकि इससे शरीर के बाकी ऑर्गन्स को नुकसान न हो. जब हमारे शरीर का शुगर लेवल अनकंट्रोल हो जाता है, तो इससे हमारी नसें डैमेज होने लगती हैं. डायबिटीज के मरीज पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ये लक्षण डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी की शुरुआत हो सकते हैं, जिसमें नसें धीरे-धीरे डैमेज होने लगती हैं. डायबिटिक न्यूरोपैथी के संकेतों को नजरअंदाज करना गंभीर कॉम्प्लिकेशंस पैदा कर सकता है.

डॉक्टर मोहन डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर एंड मद्रास डायबिटीज फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. वी मोहन ने TOI को बताया कि जब शरीर में ग्लूकोज का स्तर लगातार ज्यादा रहता है, तो यह छोटी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है. ये कैपिलरी नसों तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने का काम करती हैं. इन वाहिकाओं के खराब होने से नसों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता और वे सही तरीके से काम करना बंद कर देती हैं. इसकी वजह से हाथ और पैरों में सेंसिटिविटी महसूस होने लगती है. इस स्थिति के शुरुआती लक्षणों में सुई चुभने जैसी झुनझुनी, हल्की जलन, सुन्नपन या पिन्स एंड नीडल्स जैसा महसूस होता है. कुछ लोगों को ऐसा लगता है जैसे वे रुई पर चल रहे हों, जबकि कई मरीजों को रात के समय तेज दर्द या जलन महसूस होती है.
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डॉक्टर ने बताया कि समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे बढ़कर मांसपेशियों की कमजोरी, संतुलन खोने और पैरों में अल्सर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है. डायबिटीज के मरीजों में नसों की समस्या का एक अनदेखा कारण विटामिन B12 की कमी भी है. खासतौर पर जो लोग लंबे समय से मेटफॉर्मिन दवा ले रहे हैं, उनमें यह कमी ज्यादा देखी जाती है. मेटफॉर्मिन शुगर कंट्रोल में मदद करती है, लेकिन यह शरीर में विटामिन B12 के अवशोषण को कम कर सकती है. चूंकि B12 की कमी और न्यूरोपैथी के लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं, इसलिए नियमित जांच जरूरी हो जाती है.

एक्सपर्ट की मानें तो नसों को डैमेज से बचाने के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना और HbA1c लेवल को ठीक बनाए रखना जरूरी है. डॉक्टर अक्सर डायबिटीज के कुछ मरीजों को विटामिन B12 और अन्य B-विटामिन्स के सप्लीमेंट्स लेने की सलाह भी देते हैं. ये सप्लीमेंट नसों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. दर्द और जलन से राहत के लिए कैप्सैसिन युक्त क्रीम या मेंथॉल, कपूर और नीलगिरी जैसे तत्वों वाले प्रोडक्ट उपयोगी साबित हो सकते हैं. पैरों में होने वाली झुनझुनी या सुन्नपन को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. समय पर जांच, सही ट्रीटमेंट और लाइफस्टाइल में सुधार से इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है. नियमित रूप से विटामिन B12 की जांच, पैरों की देखभाल और डॉक्टर की सलाह का पालन करना भी जरूरी है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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