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वाराणसी के मां विशालाक्षी मंदिर को 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है. मां सती के आभूषण से जुड़ी मान्यता, दक्षिण भारतीय वास्तुकला और प्राचीन धार्मिक परंपराएं इस मंदिर को बेहद खास बनाती हैं.
वाराणसी का मां विशालाक्षी मंदिर. (Photo- Ankit Dhawan/UP tourism)
वाराणसी की गलियों में स्थित मां विशालाक्षी मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पौराणिक मान्यताओं और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल है. मीर घाट के पास स्थित इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है. यहां देवी विशालाक्षी की पूजा शक्ति स्वरूप में की जाती है. मंदिर की खासियत यह है कि इसकी धार्मिक पहचान काशी की परंपराओं के साथ-साथ दक्षिण भारतीय संस्कृति से भी जुड़ी हुई है.
मां विशालाक्षी मंदिर से जुड़ी सबसे प्रचलित मान्यता देवी सती की कथा से संबंधित है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में सती ने अपने प्राण त्याग दिए थे. इसके बाद भगवान शिव उनके शरीर को लेकर विचरण करने लगे. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को अलग-अलग भागों में विभाजित किया. जिन स्थानों पर उनके अंग या आभूषण गिरे, वे शक्तिपीठ कहलाए.
Maa Vishalakshi Temple: Discover The Spiritual Heritage Of Varanasi
Rooted in the ancient spiritual traditions of Varanasi, Maa Vishalakshi Temple is a revered Shakti Peeth dedicated to Goddess Vishalakshi. Located near the iconic Manikarnika Ghat, the temple holds deep religious significance and draws devotees seeking the blessings of the Goddess.
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