ईरान के सस्‍ते ड्रोन से बचने का US ने ढूढ़ लिया जुगाड़, LOCUST का युद्धपोत पर सफल टेस्‍ट, दुश्‍मन का अब गेम-ओवर


आसमान से मौत बनकर बरसते ईरान के वो कामिकेज़ ड्रोन्स जो चंद हजार डॉलर्स में अमेरिका के करोड़ों के थाड मिसाइलों को खर्च करवा रहे थे. लेकिन अब अमेरिकी नौसेना के सबसे खूंखार विमानवाहक पोत USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश के फ्लाइट डेक से एक अदृश्य किरण निकली. न कोई धमाका, न कोई मिसाइल की गूंज और पलक झपकते ही ड्रोन्स हवा में आग के गोले बनकर धुआं-धुआं हो गए. यह कोई हॉलीवुड फिल्म नहीं बल्कि LOCUST (लो-कॉस्ट यूएएस स्वार्म डिफीट) लेजर सिस्टम का पहला सफल टेस्ट है. अमेरिका ने आखिरकार ईरान के ‘सस्ते जुगाड़’ का ‘पक्का इलाज’ ढूंढ निकाला है. ड्रोन के दम पर उछलने वाले ईरान का गेम-ओवर करने की तैयारी अमेरिका ने कर ली है. एरोवाइरोनमेंट द्वारा विकसित इस प्लग-एंड-प्ले हथियार ने अटलांटिक महासागर में कई दुश्मन ड्रोन्स को पलक झपकते ही हवा में भस्म कर दिया.

विमानवाहक पोत पर पहली बार ऐसा प्रयोग
इस परीक्षण की सबसे खास बात यह थी कि इसे एक ‘कंटेनरीकृत’ (Containerized) रूप में तैनात किया गया था. यानी इस हथियार को लगाने के लिए जहाज में किसी स्थायी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी. इसे जहाज के फ्लाइट डेक पर एक छोटे कंटेनर की तरह रखा गया और वहीं से फायर किया गया. यह विमानवाहक पोतों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है क्योंकि इन जहाजों का डेक हमेशा फाइटर जेट्स से भरा रहता है.

LOCUST लेजर सिस्टम: तकनीक और ताकत
· पावर रेटिंग: वर्तमान में यह सिस्टम 20 किलोवाट (kW) से 26 किलोवाट की क्षमता वाला है. यह छोटे और मध्यम आकार के ड्रोन्स को मार गिराने के लिए पर्याप्त है.

· सटीकता: इसमें मल्टी-बैंड रेडियो फ्रीक्वेंसी और हाई-पावर्ड ऑप्टिकल लेजर का उपयोग किया गया है जो 360-डिग्री स्कैनिंग के साथ लक्ष्य को ट्रैक करता है.

· स्पीड: लेजर प्रकाश की गति से चलती है इसलिए लक्ष्य को बचने का कोई मौका नहीं मिलता.

· शून्य लागत: एक पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है लेकिन लेजर फायर करने का खर्च सिर्फ कुछ डॉलर (बिजली की खपत) के बराबर है.

क्यों जरूरी है यह तकनीक?
आजकल युद्ध में ‘ड्रोन स्वॉर्म’ (ड्रोन का झुंड) सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. यूक्रेन युद्ध से लेकर लाल सागर में हूतियों के हमलों तक सस्ते ड्रोन्स के जरिए करोड़ों डॉलर के जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है. अमेरिकी नौसेना अब तक इन सस्ते ड्रोन्स को गिराने के लिए महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल कर रही थी जो आर्थिक रूप से घाटे का सौदा था. लेजर वेपन इस असिमेट्रिक वॉरफेयर के गणित को बदल देगा. हालांकि, एडमिरल जेम्स किल्बी के अनुसार, इसे पूरी तरह से नौसेना में शामिल करने से पहले अभी और अधिक डेटा और स्थिरता की आवश्यकता है.

सवाल-जवाब
LOCUST लेजर सिस्टम का निर्माण किस कंपनी ने किया है?

इसका निर्माण आर्लिंगटन स्थित रक्षा ठेकेदार AeroVironment (AV) और उसकी सहायक कंपनी BlueHalo ने किया है.

लेजर हथियार पारंपरिक मिसाइलों से बेहतर क्यों माने जा रहे हैं?

मुख्य रूप से दो कारणों से: पहला, इनकी ‘कॉस्ट-पर-शॉट’ लगभग शून्य है, और दूसरा, इनके पास असीमित गोला-बारूद (जब तक बिजली है) होता है, जिससे ये ड्रोन्स के झुंड को आसानी से खत्म कर सकते हैं.

इस सिस्टम की मारक क्षमता कितनी है?

यह सिस्टम मुख्य रूप से 20-26 किलोवाट की क्षमता वाला है, जिसे छोटे ड्रोन्स और टोही विमानों को बीच हवा में जलाकर राख करने के लिए डिजाइन किया गया है.

क्या यह हथियार अब हर अमेरिकी जहाज पर लगेगा?

अमेरिकी नौसेना फिलहाल इसका परीक्षण कर रही है. हालांकि यह परीक्षण सफल रहा है, लेकिन अधिकारी अभी इसकी स्थिरता और आउटपुट की निरंतरता को और अधिक परखना चाहते हैं, जिसके बाद ही इसे बड़े पैमाने पर तैनात किया जाएगा.



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