Trump Netanyahu Fight : नेतन्याहू को पीठ पीछे इतना गंदा शब्द बोलते हैं ट्रंप, लीक हुई फोन कॉल की गई गाली-गलौज!


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अमेरिकी राष्ट्रपति और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पक्की दोस्ती में गाजा और लेबनान जंग के बीच आई भयंकर कड़वाहट का एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है. न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकारों की नई किताब ‘रेजीम चेंज’ के मुताबिक, सितंबर 2025 में एक सीक्रेट फोन कॉल के दौरान ट्रंप गाजा सीजफायर को लेकर नेतन्याहू पर इस कदर भड़क गए कि उन्होंने गाली देते हुए कहा कि पूरी दुनिया और सभी यहूदी उनसे पूरी तरह पक चुके हैं. किताब में दावा किया गया है कि ट्रंप पीठ पीछे नेतन्याहू को बहुत गंदा शब्द कहते हैं.

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नेतन्याहू ट्रंप की फोन कॉल लीक

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईगो को देखकर अब लगने लगा है कि ईरान जंग खत्म होते-होते नेतन्याहू के साथ उनकी दोस्ती खत्म करके ही जाएगी. कैमरे के सामने हंसने वाले इन दोनों कद्दावर नेताओं के बीच अंदर ही अंदर भयंकर कड़वाहट घुल चुकी है. ट्रंप ने ईरान जंग के दौरान कुछ समय पहले इजरायली प्रधानमंत्री को उल्टा-सीधा सुना दिया था. लेबनान और गाजा पर दोनों दोस्तों के बीच हुई इस गरमागरमी की पूरी डीटेल लीक हो गई है. इसमें ये भी पता चला है कि ट्रंप अपने दोस्त को पीठ पीछे बेहद गंदा शब्द बोलते हैं.

नेतन्याहू की पीठ पीछे इतना गंदा शब्द बोलते हैं ट्रंप

न्यूयॉर्क टाइम्स के खोजी पत्रकारों मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की नई किताब ‘रेजीम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसीडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप’ में दावा किया गया है कि सितंबर 2025 में एक फोन कॉल के दौरान ट्रंप ने इजरायली पीएम नेतन्याहू को बुरी तरह हड़काते हुए गंदी गालियां दी थीं. ट्रंप गाजा में युद्ध रोकने के लिए इतने उतावले थे कि उन्होंने नेतन्याहू से यहां तक कह दिया, ‘बीबी, हर कोई तुमसे पक चुका है. सारे यहूदी तुमसे तंग आ चुके हैं. यहां तक कि इस फोन कॉल पर मौजूद दो यहूदी भी तुमसे परेशान हैं’. किताब में ये भी दावा किया गया है कि ट्रंप पीठ पीछे नेतन्याहू को ‘ठग’ कहते हैं, जो उनके शब्दकोश की सबसे बड़ी गाली है.

‘इस डील को मानो, बहुत लंबा खिंच गया ये युद्ध’: फोन कॉल पर भड़के ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक तौर पर भले ही इजरायल का खुलकर समर्थन करते रहे हों, लेकिन अंदरखाने वो नेतन्याहू की युद्ध नीति से बेहद चिढ़े हुए थे. किताब के मुताबिक, सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान ट्रंप अपने प्रशासन के 20-पॉइंट वाले गाजा शांति समझौते को हर हाल में लागू कराना चाहते थे. इस बातचीत के दौरान ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था.

फोन कॉल पर जब ट्रंप के मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जैरेड कुशनर भी लाइन पर थे तो ट्रंप अचानक चिल्ला पड़े. उन्होंने नेतन्याहू को गाली देते हुए कहा कि ‘चुपचाप इस डील को मान लो क्योंकि यह युद्ध पहले ही बहुत लंबा खिंच चुका है’. ट्रंप ने नेतन्याहू को चेतावनी दी कि वे इस सीजफायर डील से पीछे नहीं हट सकते. उन्होंने याद दिलाया कि जब पूरी दुनिया नेतन्याहू के खिलाफ खड़ी थी, तब अकेले ट्रंप ने उनका साथ दिया था.

दोहा एयरस्ट्राइक ने बिगाड़ा खेल: दामाद जैरेड कुशनर भी रह गए दंग

इस फोन कॉल से ठीक पहले सितंबर 2025 की शुरुआत में एक ऐसी घटना घटी थी जिसने व्हाइट हाउस को हिलाकर रख दिया था. जब अमेरिका गाजा में युद्ध विराम की बातचीत को अंतिम रूप दे रहा था, ठीक उसी वक्त इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास के नेताओं को निशाना बनाकर एक बड़ी एयरस्ट्राइक कर दी.

इस हमले से ठीक एक दिन पहले जैरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने मियामी में नेतन्याहू के करीबी सलाहकार रॉन डर्मर से मुलाकात की थी. अमेरिकी अधिकारियों को लगा कि इजरायल ने उन्हें धोखे में रखा और अंधेरे में रखकर ये हमला किया. अपनी धरती पर हुए इस हमले से कतर इस कदर भड़क गया कि उसने इजरायल-हमास के बीच मध्यस्थता करने से साफ इनकार कर दिया. किताब के मुताबिक, ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर इस बात से इतने चिढ़ गए थे कि उन्होंने इजरायलियों को ‘पागल’ तक कह दिया और बातचीत से पूरी तरह हटने का मन बना लिया था.

18 दिन बाद नेतन्याहू ने मांगी माफी

ट्रंप के तेवरों का असर ये हुआ कि इजरायल को आखिरकार बैकफुट पर आना ही पड़ा. किताब में खुलासा किया गया है कि दोहा में किए गए हवाई हमले के ठीक 18 दिन बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने न केवल अमेरिकी प्रशासन से इस कदम के लिए लिखित तौर पर माफी मांगी, बल्कि जैरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ द्वारा तैयार किए गए 20-पॉइंट के सीजफायर फ्रेमवर्क को पूरी तरह स्वीकार भी कर लिया. इस खुलासे ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में अमेरिका के उस गुप्त और आक्रामक चेहरे को सामने ला दिया है, जो अमूमन दुनिया के सामने कभी नहीं आता.

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Utkarsha Srivastava

If world leaders are arguing, borders are shifting, or a geopolitical storm is brewing somewhere on the planet, chances are Utkarsha Srivastava is already reading and writing about it.

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