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न्यूज एजेंसी एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ डील से पहले पूरी तैयारी कर रहे हैं. ईरान में दूत विटकॉफ और कुशनर का मानना है कि ओक रिज की टीम ईरान के साथ परमाणु वार्ता में भाग ले सकती है. ओक रिज नेशनल लैब को अमेरिका की सबसे अहम न्यूक्लियर रिसर्च इंस्टीट्यूट्स में गिना जाता है.
डोनाल्ड ट्रंप.
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर पर्दे के पीछे हलचल तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर इसे लेकर एक्टिव हो चुके हैं. इन दोनों ने टेनेसी के ओक रिज नेशनल लैब के टॉप न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स के साथ एक अहम बैठक की है.
रिपोर्ट में क्या किया गया दावा
न्यूज एजेंसी एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका किसी न्यूक्लियर डील की तैयारी पहले से ही शुरू कर चुका है. इसके लिए करीब 100 एक्सपर्ट की एक टीम तैयार रखी गई है, जो डील होने की स्थिति में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की निगरानी और जांच का काम संभाल सकती है.
इन एक्सपर्ट का मुख्य काम यह देखना होगा कि ईरान डील की शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं. साथ ही वे ईरान के यूरेनियम एनरिचमेंट को रोकने और उसके मौजूदा न्यूक्लियर सामान को सुरक्षित निपटाने की योजना भी बना सकते हैं.
पहले भी ये एक्सपर्ट्स कर चुके हैं काम
बताया जा रहा है कि इस टीम में शामिल कई विशेषज्ञ पहले भी परमाणु अभियानों में काम कर चुके हैं. इनमें वे विशेषज्ञ भी शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में वेनेजुएला से समृद्ध यूरेनियम को हटाने के मिशन में हिस्सा लिया था.
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जानकार इससे पहले ओमान भी गए थे, जहां अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत की तैयारी की जा रही थी. इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अब काफी गंभीर दौर में पहुंच चुकी है.
तो क्या तय हो चुकी है ईरान के साथ डील
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस बैठक का मतलब यह नहीं है कि डील तय हो गया है. लेकिन यह जरूर दिखाता है कि अमेरिका को लगता है कि बातचीत सफल होने की संभावना है. इसलिए वह पहले से तैयारी कर रहा है.
एक अधिकारी ने कहा, “हम डील का इंतजार नहीं करना चाहते. अगर कोई डील होती है तो उसे लागू करने के लिए हमें तुरंत तैयार रहना होगा.”
क्या है ओक रिज नेशनल लैब
ओक रिज नेशनल लैब को अमेरिका की सबसे अहम न्यूक्लियर रिसर्च इंस्टीट्यूट्स में गिना जाता है. यहां यूरेनियम एनरिचमेंट और सेंट्रीफ्यूज टेक्निक्स के एक्सपर्ट काम करते हैं. इससे पहले में कजाकिस्तान और लीबिया जैसे देशों की परमाणु सामग्री को सुरक्षित तरीके से हटाने में भी इस लैब की अहम भूमिका रही है.
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर समझौते की संभावना भले अभी तय न हो, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत अब अहम मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है.
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