उन्होंने कहा कि ईरान के हालिया स्विट्जरलैंड दौरे का मकसद एमओयू की उन शर्तों को लागू कराना था, जिनमें सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, लेबनान में शांति बहाल करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना, ईरानी कच्चे तेल के निर्यात के लिए अमेरिकी छूट जारी करना और ईरान की फ्रीज हुई संपत्तियां वापस दिलाना शामिल है। उन्होंने कहा कि जब तक ये पांच शुरुआती शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक समझौते की बाकी शर्तों पर अमल शुरू नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि ईरान, अमेरिका और लेबनान ने मिलकर संयुक्त समिति बनाने पर सहमति जताई है। इस समिति का काम युद्धविराम लागू कराना, लेबनान में युद्ध पूरी तरह खत्म कराना और उसकी संप्रभुता की रक्षा करना होगा। उन्होंने कहा कि तीन पक्षों में से ईरान और अमेरिका अपने-अपने प्रतिनिधियों के नाम पहले ही तय कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ईरान एक तरफ बातचीत का रास्ता अपनाता है, लेकिन जहां जरूरत पड़ती है, वहां वह ताकत से जवाब देने से भी पीछे नहीं हटता।




