मुरलीधर ने कहा, ‘‘आयोग को फलस्तीनी बच्चों की जानबूझकर और लक्षित करके हत्या करने के पुख्ता सबूत मिले हैं। इसमें अक्टूबर 2025 के संघर्ष-विराम के बाद की घटनाएं भी शामिल हैं। साथ ही, बच्चों को यताना देने, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार (जिसमें यौन और लैंगिक हिंसा भी शामिल है) और बच्चों के लिए जरूरी अहम बुनियादी ढांचों- जैसे अनाथालय, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सुविधाओं- को निशाना बनाने के सबूत भी मिले हैं।’’ उन्होंने कहा कि सात अक्टूबर 2023 और अक्टूबर 2025 के बीच बच्चों की बड़े पैमाने पर और सुनियोजित तरीके से हत्या की गई और उन्हें नुकसान पहुंचाया गया।
आयोग ने वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में बसे इजराइलियों द्वारा फलस्तीनी बच्चों के खिलाफ की जाने वाली हिंसा में हुई भारी बढ़ोतरी की भी जांच की। रिपोर्ट में कहा गया कि सात अक्टूबर, 2023 तक, गाज़ा की लगभग आधी आबादी 18 साल से कम उम्र की थी। ‘‘ये बच्चे पहले से ही इजरायली नाकेबंदी और कब्जे के साये में अपनी पूरी ज़िंदगी बिता चुके थे और उन्होंने कई बार संघर्ष और सदमे का सामना किया था।’’




