Gold US History : Dollar Vs Gold | Roosevelt Gold Rule | अमेरिका में गोल्ड रखना जब बन गया था जुर्म


वॉशिंगटन: क्या आप सोच सकते हैं कि गाढ़ी कमाई से खरीदा गया सोना घर में रखना आपको जेल पहुंचा सकता है? सुनने में यह किसी डरावनी फिल्म जैसा लगता है लेकिन दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में ये हकीकत बन चुका है. ये कहानी है साल 1933 की, जब मंदी के दलदल में फंसे अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने अपनी ही जनता के खिलाफ एक आर्थिक युद्ध छेड़ दिया था. उस दौर में अमेरिका में सोना रखना इनवेस्टमेंट नहीं, बल्कि 10 साल की जेल वाला एक संगीन जुर्म बन गया था.

अमेरिका का खौफनाक ‘ग्रेट डिप्रेशन’

1930 के दशक में अमेरिका ‘महा मंदी’ की आग में जल रहा था. लोगों का बैंकों से भरोसा उठ चुका था. उस समय दुनिया ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ पर चलती थी, जिसका सीधा मतलब था कि सरकार उतने ही नोट छाप सकती थी, जितना उसके खजाने में सोना हो.

घबराहट में लोगों ने बैंकों से अपना पैसा निकालना शुरू किया और उसे सोने के सिक्कों और ईंटों में बदलकर घरों में छिपा दिया. नतीजा यह हुआ कि बाजार से सोना गायब हो गया और सरकार के पास नए नोट छापने की ताकत खत्म हो गई. अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप होने की कगार पर थी.

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 6102: रूजवेल्ट का ‘आर्थिक हंटर’

हालात को काबू करने के लिए राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने 5 अप्रैल 1933 को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 6102 जारी किया. ये कोई गुजारिश नहीं, बल्कि एक सख्त सरकारी फरमान था. सरकार ने साफ कह दिया- ‘अपना सारा सोना चुपचाप बैंक में जमा कर दो, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो’.

इस आदेश की तीन सबसे खौफनाक शर्तें ये थीं

  • लिमिट: कोई भी व्यक्ति सिर्फ 100 डॉलर की कीमत का सोना (करीब 5 आउंस) ही अपने पास रख सकता था, वो भी सिर्फ गहनों के रूप में.
  • अनिवार्य सरेंडर: बाकी का सारा सोना सरकार द्वारा तय रेट ($20.67 प्रति आउंस) पर बैंक को बेचना मजबूरी थी.
  • सजा: अगर किसी ने सोना छिपाया, तो उस पर 10,000 डॉलर का जुर्माना और 10 साल की कैद तय थी.

अमेरिकी सरकार रातों-रात मालामाल

इस आदेश के बाद पूरे अमेरिका में हड़कंप मच गया. लोकतंत्र के इतिहास में यह पहली बार था जब सरकार ने जनता की निजी संपत्ति पर इस तरह ‘डाका’ डाला था. लोग डर और बेबसी में अपना सोना लेकर बैंकों की लंबी कतारों में लग गए.

जैसे ही सरकार के पास भारी मात्रा में सोना इकट्ठा हुआ, रूजवेल्ट ने एक और चाल चली. उन्होंने सोने की सरकारी कीमत $20.67 से बढ़ाकर सीधा $35 प्रति आउंस कर दी. इस एक झटके से सरकार की संपत्ति रातों-रात अरबों डॉलर बढ़ गई और उन्हें मंदी से लड़ने के लिए भारी-भरकम फंड मिल गया. इसे इतिहास की सबसे बड़ी ‘सरकारी लूट’ भी कहा जाता है.

41 साल तक लगा रहा सोने पर ‘पहरा’

आपको जानकर हैरानी होगी कि ये पाबंदी कोई थोड़े समय के लिए नहीं थी. अमेरिका में आम नागरिकों के लिए निवेश के तौर पर सोना रखना साल 1974 तक बैन रहा. करीब चार दशकों तक अमेरिकी नागरिक कानूनी रूप से सोना नहीं खरीद सकते थे. 1971 में जब राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने डॉलर का सोने से नाता तोड़ा, तब जाकर धीरे-धीरे इस पाबंदी के हटने का रास्ता साफ हुआ.

आज भी अर्थशास्त्री रूजवेल्ट के इस कदम को लेकर दो गुटों में बंटे हैं. कुछ का मानना है कि अगर रूजवेल्ट ये ‘कड़वी दवा’ न पिलाते, तो अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह खत्म हो जाता. वहीं, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई को जबरन छीन लिया.



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