बमबारी से नहीं झुका ईरान, तो फिर कूटनीति की शरण में ट्रंप! ब्रह्म चेलानी ने बताया क्यों फेल हुआ रिजीम चेंज का मिशन


पहले बमबारी, बाद में बात. डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध नीति से क्या अपनी ही आक्रामकता के जाल में फंस गई है? प्रख्यात रणनीतिक विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने ट्रंप के हालिया यू-टर्न को हकीकत के सामने एक बड़ा क्लाइमडाउन करार दिया है. चेलानी ने तीखे असेसमेंट में कहा कि जिस ईरानी शासन को मटियामेट करने के लिए ट्रंप ने जंग का बिगुल फूंका था, आज उसी के साथ सकारात्मक बातचीत का दावा करना वॉशिंगटन की रणनीतिक विफलता की स्वीकारोक्ति है. अयातुल्ला खामेनेई और लारीजानी जैसे शीर्ष स्तंभों को ढहाने और ईरानी नौसेना को पंगु बनाने के बावजूद, केवल हवाई ताकत से सत्ता परिवर्तन का सपना अधूरा रह गया. चेलानी के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने वाली इस जंग का समाधान अब बंदूकों या बिजली घरों को उड़ाने की धमकियों से नहीं बल्कि उसी कूटनीति से निकलेगा जिसे दरकिनार कर यह विनाशकारी खेल शुरू किया गया था. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की चाबी अब गनबोट्स के पास नहीं बल्कि उसी बातचीत की मेज पर है जहां ट्रंप को मजबूरी में लौटना पड़ा है.

ट्रंप की रणनीति की विफलता?
प्रसिद्ध रणनीतिक विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने ट्रंप के हालिया रुख को हकीकत के सामने घुटने टेकना करार दिया है.

· रणनीति का यू-टर्न: चेलानी के अनुसार जिस शासन (ईरानी) को उखाड़ फेंकने के लिए ट्रंप ने युद्ध शुरू किया था, अब उसी के साथ ‘सकारात्मक बातचीत’ करना उनकी शुरुआती सैन्य योजना की विफलता को दर्शाता है.

· हवाई शक्ति की सीमा: विश्लेषण कहता है कि शीर्ष ईरानी नेताओं की हत्या और ईरानी नौसेना व वायुसेना को पंगु बनाने के बावजूद केवल हवाई हमलों से शासन नहीं बदला जा सका. अब कूटनीति का सहारा लेना इस बात की स्वीकारोक्ति है कि ईरान को पूरी तरह सैन्य बल से नहीं झुकाया जा सकता.

· वैश्विक अर्थव्यवस्था का दबाव: स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना और वैश्विक अर्थव्यवस्था का संकट में फंसना ट्रंप के लिए इस क्लाइमडाउन (पीछे हटने) की मुख्य वजह बना है. चेलानी का मानना है कि जो काम धमकियों और पावर प्लांट उड़ाने की चेतावनियों से नहीं हुआ वह अब उसी कूटनीति से करने की कोशिश हो रही है जिसे ट्रंप ने युद्ध शुरू करते समय दरकिनार कर दिया था.

निष्कर्ष
चेलानी का मानना है कि ट्रंप की पहले बमबारी, बाद में बात की रणनीति पूरी तरह उलझ गई है. ईरान के ऊर्जा ढांचे को तबाह करने की धमकी के बीच 5 दिन का पॉज लेना वास्तव में वॉशिंगटन की सैन्य आक्रामकता की हार और जमीनी हकीकत की जीत है.

सवाल-जवाब

ब्रह्म चेलानी ने ट्रंप के सकारात्मक बातचीत वाले दावे को क्या नाम दिया है?

चेलानी ने इसे एक “Climbdown forced by reality” (हकीकत द्वारा मजबूर होकर पीछे हटना) कहा है.

चेलानी के अनुसार स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज कैसे खुलेगा?

उनके अनुसार यह गनबोट्स या धमकियों से नहीं बल्कि उसी कूटनीति से खुलेगा जिसे युद्ध शुरू करने के लिए दरकिनार कर दिया गया था.

क्या अमेरिका का ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) का लक्ष्य सफल रहा?

नहीं, चेलानी के अनुसार शीर्ष नेतृत्व के सफाए के बावजूद हवाई शक्ति से शासन को नहीं हटाया जा सका, जिसके कारण ट्रंप को अब बातचीत की मेज पर आना पड़ा है.



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