स्ट्रेस देने वाले लोगों से दूर रहिए ! एंजायटी और डिप्रेशन का बना देंगे शिकार, नई रिसर्च में बड़ा खुलासा


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Hidden Impact of Toxic Relationships: हालिया स्टडी में पता चला है कि अक्सर तनाव देने वाले लोग आपकी जिंदगी को मुश्किल बना देते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं. शोधकर्ताओं ने ऐसे लोगों को हैसलर्स बताया है. रिसर्च की मानें तो इन लोगों से जुड़ा लगातार तनाव डिप्रेशन, एंजायटी और शरीर की कमजोरी का कारण बन सकता है.

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अक्सर स्ट्रेस देने वाले और झगड़ा करने वाले लोग आपको बीमार कर सकते हैं.

Negative People Affect Your Health: आज के जमाने में अधिकतर लोग उम्र से पहले बूढ़े हो रहे हैं. अक्सर माना जाता है कि इसकी वजह खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान है. अब एक नई स्टडी में पता चला है कि हमारी बायोलॉजिकल एज को बढ़ाने में हमारे आसपास के लोगों का भी योगदान होता है. जो लोग आपको हमेशा तनाव देते हैं, झगड़े करते हैं या जिंदगी को मुश्किल बनाते हैं, वे आपकी एजिंग प्रोसेस को तेज कर रहे हैं. वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों को हैसलर्स (hasslers) माना है. ऐसे लोग हमारे मन ही नहीं, बल्कि शरीर पर भी बुरा असर डालते हैं और जैविक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं.

सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले यह समझ लेते हैं कि बायोलॉजिकल एज क्या है. हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बायोलॉजिकल एज हमारी असली शारीरिक स्थिति को दिखाती है. इससे पता चलता है कि शरीर अंदर से कितना स्वस्थ या कमजोर है. अगर आपकी असली उम्र 30 साल है, तो बायोलॉजिकल एज 50 साल भी हो सकती है. दरअसल आपकी सेहत अच्छी नहीं रहेगी, तो आप उम्र से पहले ही बूढ़े हो जाएंगे. अब नई रिसर्च की बात कर लेते हैं. इस रिसर्च में पता चला है कि अगर आपके जीवन में तनाव देने वाले लोग ज्यादा हैं, तो आपकी बायोलॉजिकल उम्र तेजी से बढ़ सकती है. मतलब आपका शरीर असल उम्र से ज्यादा जल्दी बूढ़ा होने लगता है.
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यह भी दिलचस्प बात है कि ये हैसलर्स अक्सर हमारे बहुत करीबी लोग होते हैं. रिसर्च के अनुसार परिवार के सदस्य जैसे माता-पिता या बच्चे कई बार दोस्तों से ज्यादा तनाव देते हैं. इसके अलावा ऑफिस के सहकर्मी, पड़ोसी या रूममेट भी इस लिस्ट में शामिल हो सकते हैं. आसान भाषा में समझें, तो जिन लोगों के साथ हम रोज रहते हैं, वही कभी-कभी हमारे लिए सबसे बड़ा तनाव बन जाते हैं. कुछ लोग ऐसे तनाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं. जैसे महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा हैसलर्स होती हैं. जिन लोगों का बचपन मुश्किल रहा हो या जो पहले से किसी बीमारी या खराब आदत से जूझ रहे हों, उनके जीवन में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा हो सकती है. इस तरह तनाव और स्वास्थ्य समस्याएं एक-दूसरे को बढ़ाते रहते हैं.

मेंटल हेल्थ पर इसका असर सबसे ज्यादा होता है. ज्यादा तनाव देने वाले लोगों के साथ रहने से एंजायटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है. इससे व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है, नींद खराब होती है और ध्यान लगाने में दिक्कत होती है. धीरे-धीरे यह थकान और मानसिक बोझ रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित करने लगता है. शोधकर्ताओं की मानें तो इन समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपनी सीमाएं तय करें. हर रिश्ते में यह समझना जरूरी है कि आपको कितना समय और एनर्जी देनी है. अगर किसी को पूरी तरह दूर करना संभव नहीं है, तो भी उनके साथ अपने व्यवहार की सीमा तय करें. इसके साथ ही ध्यान, व्यायाम और अच्छी आदतों को अपनाएं. सबसे जरूरी बात है कि आप अपनी शांति को प्राथमिकता दें.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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