Last Updated:
Gold vs Iran Conflict : ईरान युद्ध के साथ दुनिया में अभी तीन लड़ाइयां चल रही हैं. ऊपर से टैरिफ वॉर ने कारोबारियों के सामने चुनौती बना रखी है. अमेरिका हो या भारत अथवा एशिया का अन्य शेयर बाजार, लगातार गिरावट का सामना कर रहे हैं. बावजूद इसके सोने की कीमतों में कोई उछाल नहीं दिख रहा. आखिर जोखिम बढ़ने के बावजूद अभी सोने की कीमत क्यों टूटती जा रही है.
डॉलर की मजबूती के कारण अभी सोने के भाव नहीं बढ़ रहे हैं.
नई दिल्ली. कहते हैं, जब दुनिया भी दुनिया पर संकट आता है तो सोने के भाव आसमान की तरफ भागते हैं. लेकिन, इस बार जब सच में दुनिया संकट में दिख रही तो सोना भी गोते मार रहा है, आखिर क्यों. सोने और चांदी को अपना ऑट स्पॉट मानने वाले निवेशक अभी सकते में हैं. उन्हें पूरा यकीन था कि इजराइल और ईरान का युद्ध जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, दोनों कीमती धातुओं का भाव भी आसमान की तरफ बढ़ता जाएगा. लेकिन, लड़ाई शुरू हुए तो करीब 20 दिन होने को आए, अभी तक सोने की कीमत बढ़ने के बजाय और नीचे गिरती जा रही है. इस गिरावट को देखकर निवेशक ही नहीं, एक्सपर्ट भी थोड़े हैरान हैं. लेकिन, हम आपको बताते हैं कि इस गिरावट की वजह बिलकुल भी चौंकाने वाली नहीं है.
ईरान और इजराइल के बीच युद्ध शुरू होने से पहले ग्लोबल मार्केट में सोने का भाव 5 हजार डॉलर से भी ऊपर चल रहा था, लेकिन अब उसका भाव 4,600 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया है. मार्च की शुरुआत से ही सोने की कीमतों पर दबाव दिख रहा है. चाहे ग्लोबल मार्केट में इसकी कीमतों को देखें या फिर घरेलू हाजिर बाजार का भाव देखें. सोने का भाव पिछले एक पखवाड़े में 7 फीसदी से भी ज्यादा टूट गया है. ग्लोबल मार्केट में चांदी का भाव भी मार्च महीने में 8 फीसदी के आसपास नीचे आ गया है.
डॉलर नहीं बढ़ने दे रहा सोने का भाव
आप सोच रहे होंगे कि ईरान और इजराइल युद्ध के साथ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अलावा रूस और यूक्रेन भी फिलहाल एक-दूसरे पर गोले बरसा रहे हैं. ऊपर से टैरिफ वॉर की वजह से दुनियाभर का कारोबार उथल-पुथल हो गया है. शेयर बाजार अमेरिका से लेकर भारत औार एशिया तक में औंधे मुंह गिर रहे हैं तो सोने का भाव ऊपर क्यों नहीं जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह डॉलर है. अभी डॉलर ही सभी निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित दिख रहा है और वे अपना पैसा भी यहीं लगा रहे हैं, जिसका असर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित चीजों पर भी पड़ रहा है.
क्यों डॉलर के आगे बेबस है सोना
ईरान युद्ध का सबसे ज्यादा असर कच्चे तेल और गैस पर दिख रहा है. चूंकि, इन दोनों की सप्लाई पर असर पड़ा है तो इनकी कीमतों में भी ताबड़तोड़ उछाल आ रहा है. ग्लोबल मार्केट में क्रूड का भाव तो 120 डॉलर प्रति बैरल के भी ऊपर जा चुका है. यह तो आप भी जानते हैं कि दुनियाभर में एनर्जी का व्यापार डॉलर में होता है तो महंगे होते क्रूड और गैस का फायदा भी डॉलर को मिल रहा है. तभी तो फॉरेक्स पर भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले करीब गिरकर 93 के आसपास जा चुकी है, जो उसका अब तक का रिकॉर्ड है. डॉलर महंगा होने से सोने की खरीद भी महंगी हो जाती है, क्योंकि भारत में सोना भी डॉलर में ही खरीदा जाता है, लेकिन यह तेल के मुकाबले ज्यादा जरूरी नहीं लगता. लिहाजा अभी तेल और गैस की खरीद ज्यादा हो रही है, बजाय के सोने और चांदी की खरीद के.
ग्लोबल मार्केट का भी दिख रहा असर
सोने और चांदी की खरीद पर सिर्फ देश के अंतर ही असर नहीं दिख रहा, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी इन दोनों कीमती धातुओं की खरीद-फरोख्त पर बखूबी असर दिखा है. तेल की कीमतें बढ़ने से दुनियाभर में महंगाई का जोखिम भी बढ़ता जा रहा है, क्योंकि ईंधन पर ही सभी जरूरी चीजें निर्भर होती हैं. महंगाई का दबाव आता है तो थोक से लेकर खुदरा खरीदार तक सोने-चांदी जैसी लग्जरी चीजों के बजाय जरूरत वाली चीजों की खरीदारी बढ़ा देते हैं. ऊपर से निवेशकों को इस बात की उम्मीद भी अब कम ही हो गई है कि फेड रिजर्व अपनी ब्याज दरों में कटौती करेगा. ब्याज नीचे आई तो महंगाई का जोखिम और बढ़ जाएगा.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





