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Ranakpur Tourist Places: राजस्थान के पाली जिले में स्थित रणकपुर अपनी खूबसूरत वादियों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए मशहूर है. यहां 1444 नक्काशीदार खंभों वाला भव्य जैन मंदिर, सूर्य मंदिर, रणकपुर बांध, परशुराम महादेव गुफा और जंगल सफारी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. जानिए रणकपुर की 5 ऐसी शानदार जगहें, जहां इतिहास, आस्था और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिलता है.
रणकपुर का चौमुखा जैन मंदिर जिससे पूरे रणकपुर की पहचान पूरे देशभर में है. जैन मंदिर भारत के सबसे विशाल और भव्य जैन तीर्थों में से एक माना जाता है. 15वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर पूरी तरह से शुद्ध सफेद संगमरमर से बना हुआ है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसके 1,444 संगमरमर के तराशे गए खंभे हैं. लोक मान्यता है कि इन खंभों को सही-सही गिनना लगभग असंभव है, क्योंकि हर बार गिनती अलग आती है.
केवल खंभो तक सीमित नही बल्कि लगभग 40,000 वर्ग फीट के क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर 29 प्रार्थना हॉलों और 80 सुंदर गुंबदों से सुसज्जित है. मंदिर की छतों और दीवारों पर की गई संगमरमर की नक्काशी इतनी बारीक और जटिल है कि देखने वाला दंग रह जाता है. मुख्य गर्भगृह में प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की चार मुख वाली 72 इंच ऊँची विशाल संगमरमर प्रतिमा स्थापित है, जो चारों दिशाओं में उन्मुख है.
इस भव्य मंदिर का निर्माण 1437 ईस्वी के आसपास मेवाड़ के राजा राणा कुंभा के संरक्षण में जैन व्यापारी धरणा शाह ने शुरू करवाया था. मंदिर परिसर अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों और मथाई नदी के शांत वातावरण के बीच स्थित है. यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों को एक असीम शांति और आत्मिक सुकून का अनुभव होता है. यहाँ का अनुशासन, हरा-भरा उद्यान और ऐतिहासिक शांति इस स्थल को दुनिया भर के पर्यटकों के लिए राजस्थान का एक अनिवार्य पड़ाव बनाते हैं.
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मुख्य जैन मंदिर परिसर के निकट ही स्थित ‘सूर्य मंदिर’ रणकपुर का एक अन्य प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आकर्षण है. 13वीं-14वीं शताब्दी का यह मंदिर भगवान सूर्य देव को समर्पित है. इस मंदिर की वास्तुकला प्रसिद्ध कोणार्क के सूर्य मंदिर से मिलती-जुलती है, जहाँ रथ शैली में पत्थरों को तराशा गया है. मंदिर की बाहरी दीवारों पर उकेरी गई आकृतियाँ और बारीक नक्काशी तत्कालीन भारतीय शिल्पकला की समृद्धि को दर्शाती हैं.
रणकपुर जैन मंदिर के करीब स्थित रणकपुर बांध प्रकृति प्रेमियों और फुर्सत के पल बिताने वालों के लिए एक बेहतरीन जगह है. पहाड़ों और हरियाली से घिरा यह बांध बहुत ही शांत वातावरण प्रदान करता है. विशेष रूप से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ का पानी और आसपास का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. शहर के शोर-गुल से दूर यहाँ पर्यटक ठंडी हवाओं का आनंद लेने के साथ ही फोटोग्राफी के लिहाज से खूब पसंद करते है.
रणकपुर से थोड़ी ही दूरी पर अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित ‘परशुराम महादेव मंदिर’ एक प्रसिद्ध गुफा मंदिर है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के अवतार परशुराम ने स्वयं अपनी कुल्हाड़ी से इस गुफा का निर्माण किया था और भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. समुद्र तल से ऊंचाई पर स्थित इस प्राकृतिक गुफा मंदिर तक पहुँचने के लिए पहाड़ियों के रास्ते सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. यहाँ का शांत वातावरण और प्राकृतिक शिवलिंग श्रद्धालुओं के मन में गहरी आस्था जगाता है.
इतिहास और आध्यात्म के अलावा रणकपुर रोमांच और वन्यजीव प्रेमियों को भी आकर्षित करता है. अरावली की घाटियों में फैली रणकपुर जंगल सफारी (कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा) में आप जीप सफारी के जरिए जंगल की सैर कर सकते हैं. इस सफारी के दौरान तेंदुओं (Leopards), सांभर, नीलगाय, चौसिंगा और कई दुर्लभ प्रजाति के देशी-विदेशी पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखा जा सकता है. घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के बीच की यह सफारी आपकी यात्रा को यादगार बनाती है.




