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मेघालय का Dawki Living Root Bridge अपनी अनोखी बनावट के लिए खास है. पेड़ों की जीवित जड़ों को वर्षों तक एक खास दिशा में बढ़ाकर तैयार किया गया यह पुल प्रकृति और इंसानी हुनर का शानदार मेल दिखाता है.
मेघालय का Dawki Living Root Bridge (AI image)
भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जहां प्रकृति और इंसानी हुनर का अनोखा मेल देखने को मिलता है. मेघालय का Dawki Living Root Bridge भी ऐसी ही जगह है. यहां लोहे या सीमेंट की मदद से नहीं, बल्कि पेड़ों की जीवित जड़ों को एक खास तरीके से दिशा देकर पुल तैयार किया गया है. हरे-भरे पहाड़ों और जंगलों के बीच बना यह पुल देखने में जितना अनोखा है, इसके बनने की प्रक्रिया उतनी ही दिलचस्प है.
लिविंग रूट ब्रिज को तैयार करने में कई साल लगते हैं. मेघालय के स्थानीय समुदायों ने पीढ़ियों से इस तकनीक का इस्तेमाल किया है. इसके लिए आमतौर पर रबर फिग यानी Ficus elastica के पेड़ों की मजबूत जड़ों को धीरे-धीरे नदी या नाले के दूसरी तरफ बढ़ने के लिए दिशा दी जाती है. शुरुआत में बांस या लकड़ी के सहारे की मदद से जड़ों को सही रास्ते पर बढ़ाया जाता है. समय के साथ जड़ें मोटी होती जाती हैं और आपस में जुड़कर पुल जैसी मजबूत संरचना बना लेती हैं.
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