रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर टिप्पणी करना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो को भारी पड़ गया. अब नवारो ने इस मसले पर ट्रोलिंग का आरोप लगाते हुए लोगों से ऐसा न करने की अपील की है. पीटर नवारो ने बताया कि उन्हें भारत-रूस तेल व्यापार पर टिप्पणी करने के बाद लगातार इंटरनेट पर ट्रोल किया गया, उन पर ‘गंदे हमले’ किए गए.
व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने कहा कि भारत की व्यापार नीतियों और रूसी तेल खरीद की बार-बार आलोचना करने के बाद उन्हें इंटरनेट पर बहुत ज्यादा ट्रोल किया गया. उन्होंने इस प्रतिक्रिया को “फायरबॉम्ब” की तरह बताया.
पीटर नवारो ने कहा, “मुझे इंटरनेट पर भारतीय महाद्वीप से तरह-तरह के गंदे छोटे हमलों से फायरबॉम्ब किया गया. मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि ऐसा मत करो. अमेरिका में हम समस्याएं इस तरीके से नहीं सुलझाते.”
बता दें कि पीटर नवारो भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के लगातार आलोचक रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया था कि नई दिल्ली रूस के साथ तेल और ऊर्जा व्यापार के जरिए मास्को के यूक्रेन युद्ध को आर्थिक मदद दे रही है. भारत ने रूस से तेल ज्यादा मात्रा में खरीदना साल 2022 के बाद शुरू किया, जबकि रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हो चुका था. भारत के तेल खरीद का फायदा रूस को मिल रहा था. नवारो ने भारत को “टैरिफ का महाराजा” कहा और एक मौके पर भारत को “क्रेमलिन के लिए लॉन्ड्रोमैट” तक बता दिया था.
हालांकि उनके बयान के आने के तुरंत बाद ही भारतीय लोगों ने उनकी आलोचना की. अब उस आलोचना का जवाब देते हुए पीटर नवारो ने अपने भारतीय आलोचकों से कहा कि वे “गंदे छोटे हमले” बंद करें. उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि ऐसा मत करो. अमेरिका में हम समस्याएं इस तरीके से नहीं सुलझाते.” नवारो ने यह नहीं बताया कि उन्हें ऑनलाइन कौन से खतरे या हमले मिले, लेकिन उन्होंने प्रतिक्रिया को व्यापक बताया.
पीटर नवारो ने भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर क्या कहा?
पीटर नवारो ने बार-बार यह तर्क दिया है कि 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी और इस व्यापार से रूस को यूक्रेन के खिलाफ चल रहे अपने युद्ध के लिए मजबूती और पैसा मिला.
उन्होंने कहा, “रूस के यूक्रेन पर हमले से पहले भारत रूस के साथ तेल व्यापार में शामिल नहीं था, लेकिन उसके बाद वह इसमें बहुत ज्यादा शामिल हो गया और रूस की ओर से बहुत सारे रिफाइंड उत्पाद बेच रहा था, जिससे युद्ध मशीन को मदद मिली.”
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी आलोचना की वजह से भारत की रूसी तेल खरीद में कमी आई. उन्होंने कहा, “शायद उस ऑप-एड से मेरा थोड़ा योगदान रहा,” जिसमें उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स में लिखे अपने एक लेख का जिक्र किया.
बता दें कि भारत ने पहले भी पीटर नवारो की टिप्पणियों को खारिज किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने पहले नवारो के बयानों को “गलत और भ्रामक” बताया था और कहा था कि भारत इन दावों को खारिज करता है.




