Meta का बड़ा AI दांव! नया Muse Glimmer मुफ्त में होगा डाउनलोड, चलेगा आपके कंप्यूटर पर, बड़े सर्वर को टक्कर?


मेटा प्लेटफॉर्म्स ने एक नया AI मॉडल पेश किया है जिसका नाम है म्यूज ग्लिमर. यह मॉडल खास बात यह है कि इसे आप अपने घर के कंप्यूटर पर डाउनलोड करके चला सकते हैं. बड़े-बड़े कंपनी वाले सर्वर की जरूरत नहीं पड़ती. मेटा ने सोमवार को इसकी घोषणा की है.

म्यूज ग्लिमर असल में कंपनी के बड़े मॉडल म्यूज स्पार्क 1.2 का छोटा और हल्का वर्जन है. इसे बनाते समय मेन फोकस एफिशिएंसी पर रखा गया है ताकि कम पावर वाले कंप्यूटर पर भी आसानी से चल सके. इसमें करीब 30 अरब पैरामीटर हैं. पैरामीटर मतलब वे आंकड़े जिनसे एआई सीखता और फैसला लेता है. इतने पैरामीटर होने के बावजूद यह सिर्फ एक ग्राफिक्स कार्ड (जीपीयू) से काम कर सकता है.

इसका मुख्य काम एजेंट जैसी चीजें करना है- जैसे आपके शेड्यूल को मैनेज करना, फाइलें ऑर्गनाइज़ करना और रोजमर्रा के छोटे-मोटे काम संभालना है. इस मॉडल के वेट्स (वे आंकड़े जो एआई को चलाते हैं) हगिंग फेस प्लेटफॉर्म पर मुफ्त उपलब्ध होंगे. कोई शुल्क नहीं लगेगा. आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं, और अपनी जरूरत के हिसाब से बदल सकते हैं और अपने कंप्यूटर पर चला सकते हैं.

बाकी मॉडल्स से कैसे है अलग?

कंप्यूटिंग की बिजली या हार्डवेयर का खर्च आपको खुद उठाना होगा. मेटा बाद में ज्यादा ताकतवर म्यूज स्पार्क के कुछ वर्जन के वेट्स भी खोलने का इरादा रखती है. यह मॉडल दूसरों से कई मायनों में अलग है. ओपनए AI और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां अपने एआई मॉडल को बंद रखती हैं. वे इन्हें सिर्फ अपनी क्लाउड सर्विस के जरिए देते हैं और कंट्रोल अपने पास रखते हैं. कहा जाता है कि खुले मॉडल से सुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है.

इसके अलग मेटा का मानना है कि एआई को सबके बीच बांटना चाहिए. मार्क जुकरबर्ग ने एक लंबे लेख में लिखा कि सुपरइंटेलिजेंस को एक जगह केंद्रित करने के बजाय हर व्यक्ति को इसे इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए. इससे लोग अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकेंगे.

ये कंपनियां भी ला रही हैं सस्ते मॉडल

गूगल भी जेम्मा नाम के खुले मॉडल देता है जो लोकल डिवाइस पर चल सकते हैं. चीन की कंपनियां जैसे डीपसीक, मूनशॉट और अलीबाबा सस्ते खुले मॉडल ला रही हैं. इनकी वजह से अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है जो पैसे लेकर एआई एक्सेस देती हैं. मेटा पहले भी लामा नाम के खुले मॉडल जारी कर चुकी है, हालांकि उनकी प्रतिक्रिया मिली-जुली रही.

जुकरबर्ग का कहना है कि विदेशी खुले मॉडल पर रोक लगाना सही समाधान नहीं है. अमेरिका को खुद सबसे अच्छे खुले मॉडल बनाने चाहिए. उन्होंने उन कंपनियों की आलोचना की जो एआई सिर्फ कंपनियों, सरकारों या संस्थानों के लिए बना रही हैं.

मेटा का लक्ष्य ‘हर किसी के लिए व्यक्तिगत सुपरइंटेलिजेंस’ बनाना है. अमेरिका में इस बात पर बहस चल रही है कि खुले एआई मॉडल को कितना आजाद छोड़ना चाहिए. कुछ नीति-निर्माता चीन के खुले मॉडल पर पाबंदी लगाने की बात कर रहे हैं. लेकिन तकनीक उद्योग के कई नेता, जैसे एनवीडिया के सीईओ, कहते हैं कि खुले मॉडल लंबे समय में एआई के विकास और सुरक्षा के लिए अच्छे हैं. ट्रंप प्रशासन फिलहाल खुले मॉडल पर सख्त टेस्टिंग अनिवार्य नहीं कर रहा. कंपनियां स्वेच्छा से अपने नए मॉडल सरकार को दिखा सकती हैं.

ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का खर्च
मेटा एआई पर बहुत पैसा लगा रही है. कई बड़ी कंपनियां मिलकर ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर रही हैं. निवेशकों को चिंता है कि इतना खर्च कभी वापस आएगा या नहीं. मेटा पिछले महीने म्यूज स्पार्क 1.1 के डेवलपर एक्सेस पर चार्ज भी लगाना शुरू कर चुकी है. कंपनी क्लाउड बिजनेस भी शुरू करने की योजना बना रही है जहां एआई कंप्यूटिंग पावर बेची जाएगी.

साथ ही डेटा सेंटर वाले इलाकों में एक अरब डॉलर का फंड लगाने का इरादा है ताकि स्थानीय समुदायों को फायदा पहुंचे. यानी कि म्यूज ग्लिमर एक छोटा, मुफ्त और डाउनलोड करने योग्य एआई मॉडल है जो साधारण कंप्यूटर पर चल सकता है. यह उन बंद मॉडलों से अलग है जो सिर्फ बड़े सर्वर पर उपलब्ध होते हैं और कंपनियों के कंट्रोल में रहते हैं. मेटा का दावा है कि इससे एआई की ताकत आम लोगों के हाथ में आएगी और हर व्यक्ति अपनी क्षमता बढ़ा सकेगा.



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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