बिहार की ये जगह है प्रवासी पक्षियों की सबसे पसंदीदा, आते हैं साइबेरिया और ऑस्ट्रेलिया से पक्षी, जानिए कैसे पहुंचे और कब जाएं


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Jamui Best Place To Visit: घूमना-फिरना पसंद है और बिहार में आसपास कहीं जाना चाहते हैं, तो आप एक ऐसी जगह घूम सकते हैं, जहां बिहार ही नहीं बल्कि साइबेरिया, नॉर्थ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से भी प्रवासी आते हैं. अगर आप पटना में हैं, तो आप मात्र 75 रुपये खर्च कर यहां पहुंच सकते हैं. अगर झारखंड के जसीडीह में हैं, तो मात्र 45 रुपये में यहां पहुंच सकते हैं. हम बात कर रहे हैं जमुई जिले के झाझा स्थित नागी पक्षी अभयारण्य की, जिसे रामसर साइट वेटलैंड के रूप में पहचान मिली है. यह जगह जितनी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है, उतनी ही यह जगह बर्ड वॉचिंग के लिए भी मशहूर है.

ठंड की दस्तक के साथ ही यहां देशी-विदेशी पक्षियों की चहचहाहट गूंजने लगी है. अब तक कई दुर्लभ और आकर्षक प्रजातियों के पक्षी नागी डैम क्षेत्र में देखे जा चुके हैं, जिनमें राजहंस जैसे खूबसूरत पक्षी भी शामिल हैं. हर साल की तरह इस बार भी साइबेरिया, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंच रहे हैं.

ये पक्षी करीब दो महीने तक नागी पक्षी अभयारण्य में प्रवास करते हैं. इस दौरान पूरा इलाका पक्षियों से गुलजार हो जाता है और यह नजारा पक्षी प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं होता.पर्यावरण प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए जमुई जिले का नागी-नकटी डैम आज एक अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुका है.

हालांकि यह पहचान नागी को आसानी से नहीं मिली. आज जिसे पक्षी अभयारण्य के रूप में जाना जाता है, उसे इस मुकाम तक पहुंचने में लंबा संघर्ष करना पड़ा है. नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य को एक-दो या पांच नहीं, बल्कि पूरे 36 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा. वर्ष 1984 में 25 फरवरी को वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के सेक्शन 18 के तहत नागी को पक्षी अभयारण्य का दर्जा दिया गया था.

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इसके बावजूद इसका अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने में करीब 25 साल लग गए. आखिरकार 4 सितंबर 2009 को नागी-नकटी को पक्षी अभयारण्य घोषित किए जाने का फाइनल नोटिफिकेशन जारी हुआ. इसके बाद भी यह क्षेत्र लंबे समय तक उपेक्षित रहा, लेकिन वर्ष 2020 में पहली बार नागी-नकटी को राज्य के नक्शे पर वह पहचान मिल पाई.

अगर आप पर्यावरण के बीच वक्त गुजारना चाहते हैं, तो यहां अपने पूरे परिवार के साथ पहुंच सकते हैं. इस स्थल को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित किया गया है. यहां बांस से बने वॉच टावर, बांस से बनी कुर्सियां और व्यू प्वाइंट बनाए गए हैं. इतना ही नहीं, इस जगह में प्राकृतिक सुंदरता को पहले की ही तरह सहेजकर रखा गया है.

यहां वन विभाग की तरफ से बोटिंग की भी व्यवस्था की गई है. अगर आप पक्षियों का दीदार करना चाहते हैं, तो सुबह और शाम का वक्त सबसे माकूल रहता है. पटना या जसीडीह से यहां ट्रेन से पहुंच सकते हैं. इसके लिए आपको झाझा रेलवे स्टेशन आना होगा, जहां से आप ऑटो या किसी भी वाहन के जरिए बड़े ही आसानी से नागी पक्षी अभयारण्य पहुंच सकते हैं.



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