peaceful places in Ladakh। लद्दाख की शांत जगहें, शम वैली, हनले और अनछुए गांवों में सुकून भरा सफर.


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भीड़ नहीं पसंद तो लद्दाख में ये 6 जगह भूलकर भी न करें मिस, जानें लोकेशन

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अगर आप घूमने के नाम पर भीड़, शोर और लंबी लाइनों से दूर रहना पसंद करते हैं, तो लद्दाख आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है. यहां सिर्फ पॉपुलर झीलें और टूरिस्ट स्पॉट ही नहीं, बल्कि ऐसी कई शांत और खूबसूरत जगहें भी हैं, जहां आज भी प्रकृति बिना किसी दिखावे के अपने असली रूप में नजर आती है. बर्फ से ढके पहाड़, खाली सड़कें और सुकून से भरी वादियां इन जगहों को खास बनाती हैं.

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अगर आप भी उन यात्रियों में से हैं जिन्हें घूमना तो पसंद है लेकिन भीड़-भाड़ बिल्कुल नहीं सुहाती, तो लद्दाख आपके लिए सिर्फ पांगोंग झील और नुब्रा वैली तक सीमित नहीं है. इस खूबसूरत हिमालयी इलाके में ऐसी कई जगहें मौजूद हैं, जहां आज भी सुकून, खामोशी और प्रकृति का असली रूप देखने को मिलता है. ऊंचे पहाड़, खुला आसमान और कम लोग, यही वो वजह है जो लद्दाख को भीड़ से दूर रहने वाले ट्रैवलर्स के लिए खास बनाती है. अगर आप भी शांति के साथ लद्दाख की खूबसूरती महसूस करना चाहते हैं, तो इन जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें.

लेह के पश्चिमी हिस्से में स्थित शम वैली उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो सुकून की तलाश में हैं. इस इलाके को ‘एप्रिकॉट बेल्ट’ के नाम से भी जाना जाता है. यहां के छोटे-छोटे गांव, हरे-भरे खेत, शांत सड़कें और पारंपरिक लद्दाखी घर पर्यटकों को बिल्कुल अलग अनुभव देते हैं. अलची, स्कुर्बुचन और टिंगमोसगंग जैसे गांवों में न तो ज्यादा होटल हैं और न ही भारी टूरिस्ट ट्रैफिक, जिससे यहां का माहौल बेहद शांत बना रहता है. नदी किनारे टहलना और गांव की सादगी को महसूस करना यहां की सबसे बड़ी खासियत है.

भीड़ से बचने का एक और बढ़िया तरीका है लद्दाख के मठों को सही समय पर एक्सप्लोर करना. सुबह-सुबह या शाम के समय जब टूर ग्रुप्स नहीं होते, तब थिकसे, चेमरे और हेमिस जैसे मठों में अलग ही शांति महसूस होती है. इस दौरान प्रार्थनाओं की आवाज, धूप-दीप की खुशबू और पहाड़ों की खामोशी मन को गहराई से छू जाती है. ये अनुभव दिन के भीड़ भरे समय में शायद ही मिल पाता है.

अगर आप खुले आसमान और तारों की दुनिया के दीवाने हैं, तो हनले गांव जरूर जाएं. यह इलाका बेहद कम आबादी वाला है और यहां लाइट पॉल्यूशन न के बराबर है. रात के समय आसमान में बिखरे सितारे और मिल्की वे का नजारा यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है. पांगोंग जैसी मशहूर जगहों के मुकाबले हनले आज भी शांत और अनछुआ सा लगता है, जहां प्रकृति खुद आपके सामने अपनी कहानी बयां करती है.

लद्दाख के कुछ दूरदराज गांव जैसे टुर्तुक, साक्ति और सुमदा चुन भी भीड़ से दूर सच्चा अनुभव देते हैं. यहां का जीवन बेहद सरल है और लोग आज भी अपनी पारंपरिक जीवनशैली से जुड़े हुए हैं. इन गांवों में घूमते हुए आपको न शोर मिलेगा, न ट्रैफिक, बल्कि सिर्फ पहाड़ों की हवा और स्थानीय लोगों की मुस्कान मिलेगी. यही चीज इन जगहों को खास बनाती है. भीड़ से बचने के लिए सही समय चुनना भी बेहद जरूरी है.

मई के आखिर, जून की शुरुआत या सितंबर का महीना लद्दाख घूमने के लिए बेहतर माना जाता है. इस दौरान मौसम भी अनुकूल रहता है और टूरिस्ट की संख्या भी कम होती है. साथ ही होटल या कैंप की जगह अगर आप होमस्टे चुनते हैं, तो आपको ज्यादा निजी और शांत अनुभव मिलता है.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें



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