Anil Menon on ISS: इंटरनेशनल स्पेस मिशन पर पहुंचे भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन, ये कौन हैं और वहां क्या करेंगे?


नासा के भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और दो रूसी कोस्मोनॉट्स बुधवार की सुबह (भारतीय समय) इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंच गए. सोयुज एमएस-29 (Soyuz MS-29) स्पेसक्राफ्ट से तीन घंटे से ज्यादा की यात्रा के बाद वे वहां पहुंचे. उन्होंने आपस में गले मिलकर और हाथ मिलाकर स्वागत किया.

बता दें कि नासा और रॉसकॉसमॉस के साझा स्पेस मिशन के तहत रूस के रॉसकॉसमॉस स्पेसक्राफ्ट ने अनिल मेनन, प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना को लेकर मंगलवार रात 8:17 बजे IST पर बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरी. स्पेस स्टेशन के ठीक ऊपर से उड़ान भरने के बाद स्पेसक्राफ्ट ने लगभग तीन घंटे की यात्रा कर प्रिंचल मॉड्यूल पर डॉकिंग की.

डॉकिंग के बाद अंतरिक्ष यात्री स्पेसक्राफ्ट और स्टेशन की जांच में लग गए. इसके बाद भारतीय समयानुसार लगभग 2 बजे उन्होंने IST के आसपास हैच खोला.

बता दें कि यह अनिल मेनन की पहली स्पेस फ्लाइट है, जबकि दोनों रूसी कोस्मोनॉट्स दूसरी बार स्पेस गए हैं. इस दौरान अनिल मेनन के परिवार वाले काफी खुश दिखे. खासकर उनकी पत्नी अन्ना विल्हेल्म जो खुद एक अंतरिक्ष यात्री हैं और नासा प्रशासक जेयर्ड इसाकमैन बैकोनूर में मौजूद रहे.

यह स्पेस मिशन काफी लंबा है और इस दौरान अनिल मेनन, दुब्रोव और किकिना करीब आठ महीने तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ही रहेंगे. अब वे अगले साल अप्रैल 2027 में ही पृथ्वी पर वापस लौटेंगे.

वहां क्या करेंगे अनिल?
नासा के अनुसार, अनिल मेनन ISS पर वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. वे लंबे समय तक स्पेस में रहने के प्रभाव, माइक्रोग्रेविटी में खून के प्रवाह, नसों और ब्लड कंपोजिशन पर रिसर्च करेंगे.
इसके अलावा वे स्पेस में IV फ्लूइड बनाने, सेमीकंडक्टर क्रिस्टल बनाने और अल्ट्रासाउंड जैसी टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे, जो भविष्य के गहरे स्पेस मिशनों के लिए बेहद जरूरी हो सकती है.

अनिल मेनन कौन हैं?
49 वर्षीय अनिल मेनन मिनियोपोलिस में यूक्रेनी और भारतीय मूल के माता-पिता के यहां पैदा हुए. उनके पिता केपी शंकरन मेनन केरल के पालक्कड़ जिले के ओट्टापलम के रहने वाले हैं.
मेनन इमरजेंसी मेडिसिन के डॉक्टर और यूएस स्पेस फोर्स के कर्नल हैं. उन्होंने अफगानिस्तान में भी सेवा की है, एवरेस्ट पर क्लाइंबर्स की मदद की है और पोलियो वैक्सीनेशन अभियान में भी भारत में काम किया है. अब वे इस मिशन का हिस्सा हैं.

इस मिशन में अनिल मेनन भारतीय स्कूली बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र भी रॉकेट के साथ लेकर गए हैं. यह यूरी गगारिन की 65वीं वर्षगांठ और रूस-भारत स्पेस सहयोग को समर्पित है.

बता दें कि अनिल मेनन की पत्नी अन्ना सितंबर 2024 में स्पेसएक्स के पोलरिस डॉन (Polaris Dawn) मिशन पर स्पेस जा चुकी हैं. यह मिशन भारत और विश्व के स्पेस कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.



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