ईरान की पूरी हुई मुराद! दिया ऐसा घाव कि लंगड़ाने लगा अमेरिका – iran war America weapon stocks depleted fast thaad Patriot air defence interceptor


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Iran War: ईरान जंग एक बार फिर से भड़क गई है. इसके साथ ही होर्मुज स्‍ट्रेट क्राइसिस दुनिया के तमाम देशों को परेशान लगा है. तेल और गैस की कीमतों में फिर से आग लग गई है. इसके साथ ही एक और बड़ा डेवलपमेंट हुआ है. अमेरिका के हथियारों का जखीरा आधे तक पहुंच गया है. खासकर THAAD और पैट्रियट का भंडार खतरनाक स्‍तर तक कम हुआ है.

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THAAD मिसाइल इंटरसेप्‍टर का स्‍टॉक आधा हो चुका है. (फाइल फोटो/Reuters)

Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग शुरू हो गई है. यदि यह लड़ाई लंबी खिंचती है तो फिर क्‍या होगा? दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका के हथियारों का जखीरा खतरनाक स्‍तर तक कम हो गया है. THAAD और पैट्रियट इंटरसेप्‍टर का स्‍टॉक तो आधे पर पहुंच चुका है. ऐसे में यदि ईरान जंग ज्‍यादा लंबे समय तक खिंचती है तो अमेरिका के लिए खतरनाक हालात पैदा हो सकते हैं. बता दें कि राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ऐलान कर चुके हैं कि सीजफायर का दौर खत्‍म हो चुका है, ऐसे में आनेवाले दिनों में युद्ध की तीव्रता और बढ़ सकती है. अमेरिका की स्थिति ठीक वैसी ही हो सकती है, जैसी जापान और जर्मनी की दूसरे विश्‍वयुद्ध के बाद साल 1945 के बाद हो गई थी. सेकेंड वर्ल्‍ड वॉर से पहले जापान और जर्मनी बेहद शक्तिशाली थे, लेकिन उसके बाद उनकी स्थिति डांवाडोल हो गई.

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ जारी युद्ध के फिर तेज होने से अमेरिका के हथियारों का भंडार गंभीर रूप से प्रभावित होने लगा है. यदि मौजूदा रफ्तार से सैन्य अभियान जारी रहता है तो अमेरिकी सेना की भविष्य में चीन या उत्तर कोरिया जैसे संभावित प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ बड़े युद्ध लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह कहे जाने के बाद कि ईरान के साथ संघर्षविराम अब समाप्त हो चुका है, हथियारों की खपत को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं. जंग के शुरुआती चरण में अमेरिकी सेना ने लंबी दूरी तक सटीक हमला करने और मिसाइल डिफेंस के लिए इस्तेमाल होने वाली हजारों एडवांस मिसाइलों का उपयोग किया.

अमेरिका की हालत होगी खराब

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के रक्षा विश्लेषक और रिटायर्ड मरीन कर्नल मार्क कैंसियन ने कहा कि यदि अगले कुछ दिनों तक भी यही स्थिति बनी रही तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के रणनीतिक जोखिम का स्तर बढ़ सकता है. उनके मुताबिक, युद्ध के कारण हथियारों का भंडार इतनी तेजी से घट रहा है कि उसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती. CSIS के विश्लेषण के अनुसार, अप्रैल में ईरान के साथ संघर्ष समाप्त होने तक अमेरिका अपने थाड (THAAD) बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर्स का कम से कम आधा, पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टरों का लगभग आधा और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का करीब 30 प्रतिशत इस्तेमाल कर चुका था. बाद में कम तीव्रता वाले हमलों के कारण हथियारों की खपत कुछ धीमी हुई, लेकिन हथियारों के भंडार की भरपाई की रफ्तार बेहद कम बनी हुई है.

ईरान जंग के चलते पैट्रियट मिसाइल का भंडार भी लगभग आधा हो चुका है. (फाइल फोटो/Reuters)

ऐसे में तो खतरे में पड़ जाएगी बादशाहत

एक्‍सपर्ट के मुताबिक, मौजूदा उत्पादन क्षमता के तहत अमेरिकी रक्षा विभाग को हर महीने लगभग 15 नई टॉमहॉक और 20 पैट्रियट मिसाइलें ही मिल रही हैं, जबकि वर्ष 2026 में THAAD इंटरसेप्‍टर मिसाइलों की कोई नई डिलीवरी तय नहीं है. अनुमान है कि युद्ध-पूर्व स्तर तक भंडार को दोबारा पहुंचाने में तीन से पांच वर्ष लग सकते हैं. पूर्व पेंटागन अधिकारी एलेन मैककस्कर ने कहा कि अधिकांश महत्वपूर्ण हथियारों की फिर से आपूर्ति करने में कई वर्ष लगेंगे. वहीं, रक्षा विशेषज्ञ जॉन फेरारी ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से इन मिसाइलों की भरपाई के लिए अमेरिकी कांग्रेस ने अभी तक कोई अतिरिक्त बजट को मंजूरी नहीं दी है, जिससे उत्पादन सामान्य गति से ही चल रहा है.

अमेरिकी रक्षा विभाग ने क्‍या कहा?

हालांकि, अमेरिकी के रक्षा विभाग पेंटागन का कहना है कि वह डिफेंस प्रोडक्‍शन की क्षमता को तेजी से बढ़ाने के लिए काम कर रहा है. ट्रंप सरकार ने रक्षा उत्पादन अधिनियम (Defense Production Act) का उपयोग कर मिसाइल निर्माण में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को कम करने और उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की है. साथ ही जर्मनी और यूक्रेन जैसे देशों को पैट्रियट मिसाइलों के घरेलू उत्पादन की अनुमति देने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रयासों का असर दिखने में अभी कई वर्ष लगेंगे. पेंटागन ने हालांकि भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी सेना के पास अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता मौजूद है. इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि यदि लंबे समय तक मिसाइलों का इस्तेमाल जारी रहा तो भविष्य में चीन या उत्तर कोरिया के साथ किसी बड़े संघर्ष की स्थिति में अमेरिका के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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