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बिहार के मुंगेर की ऐतिहासिक धरोहर मीर कासिम की गुफा तकरीबन 250 साल पुराने इतिहास की गवाह है. दावा है कि नवाब मीर कासिम ने अंग्रेजों के हमलों से बचने के लिए इस गुप्त गुफा का निर्माण कराया था. आज भी इसका एक छोर मौजूद है, जबकि दूसरा छोर रहस्य बना हुआ है. श्रीकृष्ण वाटिका परिसर में स्थित यह स्थल इतिहास, विरासत और रहस्य का अनोखा संगम है.
बिहार के मुंगेर स्थित श्रीकृष्ण वाटिका के भीतर मौजूद मीर कासिम की ऐतिहासिक गुफा करीब 250 साल पुराने इतिहास की गवाह है. यह धरोहर आज भी अपने रहस्य और विरासत के कारण लोगों को आकर्षित करती है.

दावा है कि इस गुफा का एक छोर आज भी मुंगेर में मौजूद है, जबकि दूसरा छोर कहां निकलता था, इसका आज तक कोई प्रमाणित जवाब नहीं मिल पाया है. यही रहस्य इसे और खास बनाता है.

जानकारी दी गई इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1760 में नवाब मीर कासिम ने अंग्रेजों के हमलों से बचने और सुरक्षित आवाजाही के लिए इस गुप्त सुरंगनुमा गुफा का निर्माण कराया था.
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नवाब मीर कासिम ने बंगाल की राजधानी मुर्शिदाबाद से बदलकर मुंगेर कर दी थी. 1760 से 1764 के बीच उन्होंने शहर को मजबूत किले के रूप में विकसित कराया. आज भी विशाल दरवाजे और किले की संरचनाएं उस दौर की गवाही देती हैं.

इस ऐतिहासिक गुफा को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने इसके चारों ओर श्रीकृष्ण वाटिका का निर्माण कराया. यहां आने वाले लोग एक साथ इतिहास, विरासत और प्रकृति का अनुभव कर सकते हैं.

श्रीकृष्ण वाटिका परिसर में मीर कासिम के बेटे प्रिंस बहार और बेटी राजकुमारी गुल का मकबरा भी मौजूद है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, अंग्रेजों से बचने के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई थी.

देश के कई राज्यों में ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें पर्यटन की पहचान बन चुकी हैं. मीर कासिम की यह गुफा भी बिहार के प्रमुख हेरिटेज टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित होने की पूरी क्षमता रखती है.

प्रवेश निःशुल्क होने के बावजूद प्रचार-प्रसार और बेहतर रखरखाव के अभाव में यहां अपेक्षाकृत कम पर्यटक पहुंचते हैं. यदि इस धरोहर का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाए, तो यह मुंगेर ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकती है.




