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दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की 145 साल पुरानी टॉय ट्रेन आज भी दुनिया की सबसे खूबसूरत रेल यात्राओं में गिनी जाती है. न्यू जलपाईगुड़ी से शुरू होकर यह ट्रेन सिलीगुड़ी, सुकना, तीनधरिया, कुर्सियांग, घूम और बतासिया लूप जैसे शानदार पड़ावों से गुजरते हुए दार्जिलिंग पहुंचती है. रास्ते में घने जंगल, चाय बागान, पहाड़, धुंध और कंचनजंगा के मनमोहक नजारे यात्रियों का दिल जीत लेते हैं. जानिए इस ऐतिहासिक टॉय ट्रेन रूट के हर स्टेशन और उससे जुड़ी खास बातें.
जानिए इस ऐतिहासिक टॉय ट्रेन रूट के न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक का पूरा सफर और रास्ते पर पड़ने वाले स्टेशनंस से जुड़ी खास बातें.

1. न्यू जलपाईगुड़ी: टॉय ट्रेन का शानदार सफर न्यू जलपाईगुड़ी से शुरू होता है. करीब 88 किलोमीटर की इस यात्रा में ट्रेन मैदानों को पीछे छोड़ते हुए धीरे-धीरे पहाड़ों की ओर चढ़ती है. रास्ते में बदलते नजारे और ठंडी हवा सफर की शुरुआत को ही यादगार बना देते हैं.

2. सिलीगुड़ी जंक्शन: सिलीगुड़ी जंक्शन इस ऐतिहासिक रूट का पहला बड़ा स्टेशन है. साल 1881 में यहीं से दार्जिलिंग टॉय ट्रेन की कहानी शुरू हुई थी. यह स्टेशन मैदानों और पहाड़ों के बीच ऐसा पड़ाव है, जहां से रोमांचक सफर की असली शुरुआत महसूस होती है.
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3. सुकना स्टेशन: सुकना पहुंचते ही टॉय ट्रेन घने जंगलों और पहाड़ों के बीच दाखिल हो जाती है. यहीं से चढ़ाई शुरू होती है और मौसम भी अचानक ठंडा हो जाता है. महानंदा वन्यजीव अभयारण्य के बीच से गुजरता यह हिस्सा पूरे सफर का सबसे रोमांचक अनुभव देता है.

4. रंगटोंग स्टेशन: रंगटोंग छोटा जरूर है, लेकिन इसकी खूबसूरती किसी बड़े स्टेशन से कम नहीं है. ऊंचे पेड़ों और शांत माहौल के बीच बसा यह स्टेशन यात्रियों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाता है. यहां कुछ पल रुकना भी यादगार अनुभव बन जाता है.

5. तीनधरिया: तीनधरिया टॉय ट्रेन का तकनीकी दिल माना जाता है. यहां 1881 से पुरानी वर्कशॉप में इंजनों और डिब्बों की देखभाल की जाती है. पहाड़ों के बीच बसा यह स्टेशन रेलवे की ऐतिहासिक विरासत और इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है.

6. जिग-जैक ट्रैक: दार्जिलिंग की खड़ी चढ़ाई पार करने के लिए ट्रेन सीधे नहीं, बल्कि आगे-पीछे होकर चढ़ती है. इसे जिग-जैक तकनीक कहा जाता है. 19वीं सदी की यह अनोखी इंजीनियरिंग आज भी लोगों को हैरान कर देती है.

7. एगोनी प्वाइंट: रास्ते में आने वाला ‘एगोनी प्वाइंट’ टॉय ट्रेन का सबसे रोमांचक मोड़ माना जाता है. यहां ट्रेन गोल घूमते हुए ऊंचाई हासिल करती है. यह नजारा इतना खास होता है कि हर यात्री कैमरा निकालने पर मजबूर हो जाता है.

8. गयाबारी और महानदी: गयाबारी और महानदी के बीच सफर करते हुए चारों तरफ हरे-भरे चाय बागान नजर आते हैं. धीमी रफ्तार से चलती टॉय ट्रेन, भाप इंजन की सीटी और पहाड़ों का खूबसूरत नजारा इस हिस्से को बेहद खास बना देता है.

9. कुर्सियांग: कुर्सियांग को ‘सफेद ऑर्किड की भूमि’ कहा जाता है. यह दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का मुख्यालय भी है. यहां ट्रेन बाजार के इतने करीब से गुजरती है कि लगता है जैसे दुकानों को हाथ से छू लेंगे.

10. सोनादा: सोनादा पहुंचते-पहुंचते मौसम पूरी तरह बदल जाता है. चारों तरफ धुंध, बादल और देवदार के ऊंचे पेड़ नजर आते हैं. इस रास्ते से गुजरती टॉय ट्रेन का नजारा किसी फिल्म के खूबसूरत दृश्य जैसा लगता है.

11. घूम स्टेशन: घूम भारत का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन है. यहां मौजूद संग्रहालय में टॉय ट्रेन के 145 साल पुराने इतिहास, पुराने इंजन और दुर्लभ तस्वीरें देखी जा सकती हैं. यह पड़ाव इतिहास और रोमांच, दोनों का शानदार मेल है.

12. बतासिया लूप और दार्जिलिंग: सफर के आखिर में बतासिया लूप आता है, जहां से कंचनजंगा का शानदार नजारा दिखाई देता है. इसके बाद टॉय ट्रेन दार्जिलिंग पहुंचती है. यही वह पल होता है, जब यह ऐतिहासिक और खूबसूरत सफर हमेशा के लिए यादों में बस जाता है.




