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भारत में हाल के वर्षों में ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कंटेंट ब्लॉकिंग के आदेशों में भारी बढ़ोतरी हुई है. साल 2024 में जहां 12,000 से अधिक ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी किए गए थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा दोगुना होकर 24,000 के पार पहुंच गया. लेकिन, वीपीएन के जरिए ब्लॉक वेबसाइट्स या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक्सेस किया जा रहा है. इसी को देखते हुए सरकार ने अब वीपीएन प्रोवाइडर्स की नकेल कसने की तैयारी कर ली है.
वीपीएन यूजर के असली IP एड्रेस को छिपा देता है.
नई दिल्ली. भारत में वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) सेवाओं का इस्तेमाल करने वालों और इसे प्रोवाइड करने वाली कंपनियों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार अब वीपीएन कंपनियों की लगाम कसने की तैयारी कर ली है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार एक ऐसा सख्त कानूनी ढांचा तैयार कर रही है, जिसके तहत विदेशी वीपीएन कंपनियों को न सिर्फ भारत में अपना परमानेंट ऑफिस खोलना होगा, बल्कि स्थानीय अनुपालन अधिकारियों (Compliance Officers) भी नियुक्त करने होंगे. अगर कंपनियों ने सरकार के नियमों और निर्देशों को मानने से इनकार किया, तो भारत में मौजूद उनके अधिकारियों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.
वीपीएन कंपनियों पर सख्ती की वजह इन कंपनियों द्वारा सरकारी आदेशों का पालन न करन है. साल 2022 में भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) ने एक निर्देश जारी किया था. इसके तहत वीपीएन कंपनियों के लिए अपने यूजर्स का नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और IP एड्रेस जैसे संवेदनशील डेटा को 5 साल तक सुरक्षित रखना अनिवार्य किया गया था. लेकिन, एक्सप्रेस वीपीएन (ExpressVPN), नॉर्ड वीपीएन (NordVPN), प्रोटॉन वीपीएन (Proton VPN) और सर्फशार्क (Surfshark) जैसी दिग्गज कंपनियों ने इसका विरोध किया और भारत से अपने फिजिकल सर्वर ही हटा लिए.
कैसे काम करता है वीपीएन
वीपीएन यूजर के असली IP एड्रेस को छिपा देता है और इंटरनेट ट्रैफिक को किसी दूसरे देश के सर्वर के जरिए रूट करता है. इससे ऐसा लगता है कि यूजर भारत में नहीं, बल्कि किसी और देश में बैठकर इंटरनेट चला रहा है. इसी बाईपास तकनीक के कारण सरकार द्वारा ब्लॉक की गई चीजें भी भारत में आसानी से खुल जाती हैं.
ब्लॉक कंटेंट देखने का चोर रास्ता बना वीपीएन
पिछले कुछ समय में यह देखा गया है कि लोग वीपीएन का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर उन वेबसाइट्स, ऐप्स और ऑनलाइन कंटेंट को एक्सेस कर रहे हैं, जिन्हें सरकार ने भारत में ब्लॉक किया हुआ है. इस साल NEET-UG री-टेस्ट से पहले सरकार ने अस्थायी रूप से टेलीग्राम (Telegram) को ब्लॉक किया था. उस दौरान प्रोटॉन वीपीएन के महाप्रबंधक डेविड पीटरसन ने खुलासा किया था कि भारत से उनके वीपीएन ऐप के रजिस्ट्रेशन में अचानक 120% से ज्यादा का उछाल आ गया था. बाद में सरकार ने उनका वह पोस्ट और X अकाउंट दोनों भारत में ब्लॉक कर दिए थे.




