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Brahmos vs LRASM: चीन को समंदर में दफन करने के लिए अमेरिका ने अपने सबसे बड़े अदृश्य काल B-2 स्टील्थ बॉम्बर से नई LRASM मिसाइल दागकर पूरी दुनिया को हिला दिया है. रेंज में दमदार दिखने वाला यह ‘स्टील्थ हंटर’ स्पीड के मामले में ब्रह्मोस के आगे पानी भरता नजर आता है.
अमेरिका ने नई मिसाइल लॉन्च की.
समंदर की लहरों को चीरती हुई मौत जब चुपचाप आगे बढ़ती है तो महाशक्तियों के माथे पर भी पसीना आ जाता है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागीरी को कुचलने के लिए अमेरिकी वायुसेना ने अपने सबसे घातक अदृश्य शिकारी यानी B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर से AGM-158C LRASM मिसाइल का परीक्षण करके बीजिंग के खेमे में खलबली मचा दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े सैन्य रुख के बीच इस मिसाइल को ड्रैगन का काल बताया जा रहा है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो रफ्तार के मामले में भारत और रूस की महाबली ब्रह्मोस के आगे अमेरिका का यह नया हथियार पानी भरता नजर आता है. जहां ब्रह्मोस ध्वनि की रफ्तार से तीन गुना तेज भागकर पलक झपकते ही तबाही मचा देती है, वहीं अमेरिका की यह नई मिसाइल महज एक सबसोनिक खिलौना बनकर रह जाती है, जिसकी धीमी चाल उसे अचूक होने के बावजूद संदेह के घेरे में खड़ा करती है.
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच समुद्री वर्चस्व बनाए रखने के लिए यह मिसाइल अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड मानी जा रही है. यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं है बल्कि एक शिकारी है जो बिना जीपीएस या बाहरी इनपुट के भी दुश्मन के जहाजों को ढूंढकर तबाह कर सकती है.
कितनी घातक है ये मिसाइल?
1. रडार की नजरों से ओझल: LRASM को AGM-158 JASSM-ER (जमीन पर हमला करने वाली मिसाइल) के एयरफ्रेम पर विकसित किया गया है. इसका बाहरी ढांचा पूरी तरह स्टील्थ है जो दुश्मन के युद्धपोतों पर लगे एयर डिफेंस रडार को चकमा देने में माहिर है.
2. बिना GPS के भी अचूक निशाना: इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित गाइडेंस सिस्टम है. अगर युद्ध के दौरान दुश्मन देश अमेरिकी जीपीएस (GPS) नेटवर्क को जैम या ब्लॉक भी कर देता है तो भी यह मिसाइल ऑन-बोर्ड सेंसर, पैसिव रडार और थर्मल इमेजिंग (IIR) के जरिए समंदर में तैर रहे दुश्मन के जहाजों को खुद पहचान कर सटीक हमला करती है.
3. ग्रुप में शिकार करने की क्षमता: जब कई LRASM मिसाइलें एक साथ दागी जाती हैं तो ये आपस में डेटा लिंक के जरिए संवाद कर सकती हैं. ये तय कर सकती हैं कि किस मिसाइल को किस जहाज पर और किस एंगल से हमला करना है, जिससे दुश्मन का पूरा बेड़ा एक साथ साफ हो जाए.
LRASM बनाम दुनिया की अन्य घातक एंटी-शिप मिसाइलें
| मानक (Parameters) | AGM-158C LRASM (अमेरिका) | ब्रह्मोस – ब्लॉक 1 (भारत/रूस) | AGM-84 Harpoon (अमेरिका) |
|---|---|---|---|
| डिजाइन/अप्रोच | स्टील्थ और एआई (AI) | अति-तीव्र गति (Super Velocity) | पारंपरिक एंटी-शिप |
| रेंज (Range) | 370 – 560 किमी+ | 290 – 450 किमी+ | 125 – 240 किमी |
| स्पीड (Speed) | 0.9 मैक (सबसोनिक) | 2.8 से 3.0 मैक (सुपरसोनिक) | 0.75 मैक (सबसोनिक) |
सवाल-जवाब
AGM-158C LRASM का B-2 स्टील्थ बॉम्बर से परीक्षण इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
B-2 स्पिरिट दुनिया का सबसे खतरनाक स्टील्थ बॉम्बर है, जो दुश्मन के हवाई क्षेत्र में बिना भनक लगे घुस सकता है. अब इसमें LRASM (जो खुद एक स्टील्थ मिसाइल है) के जुड़ने से अमेरिका समंदर में बहुत लंबी दूरी से ही दुश्मन के सबसे आधुनिक युद्धपोतों और विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers) को सुरक्षित रहकर नष्ट कर सकता है.
अगर यह मिसाइल सबसोनिक (धीमी) है, तो दुश्मन का एयर डिफेंस इसे मार क्यों नहीं गिरा पाता?
भले ही इसकी रफ्तार ब्रह्मोस जैसी तेज न हो, लेकिन इसका आकार और कोटिंग इसे रडार पर ‘अदृश्य’ जैसी बना देती है. इसके अलावा, यह समंदर की लहरों से सटकर (Sea-skimming) उड़ती है और इसमें इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर (ECCM) तकनीक है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक ही नहीं कर पाते.
क्या LRASM का इस्तेमाल सिर्फ विमानों से ही किया जा सकता है?
नहीं. हालांकि इसका मुख्य परीक्षण B-2, B-1B बॉम्बर और F/A-18 सुपर हॉर्नेट जैसे लड़ाकू विमानों से किया गया है, लेकिन इसे जहाजों पर लगे वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (VLS Mk 41) से भी दागे जाने के लिए डिजाइन किया गया है.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें




