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अमेरिकी राजनीति के प्रसिद्ध अखबार ‘द हिल’ में 14 मई को लिखे अपने एक बेहद भावुक और कड़े लेख में रुशान अब्बास ने सीधे अमेरिकी प्रशासन पर सवाल दागे थे. उन्होंने लिखा था, ‘मैं दुनिया के सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक देश के नेता डोनाल्ड ट्रंप से गुहार लगा रही हूं कि वे बीजिंग जाकर एक क्रूर तानाशाह की आंखों में सीधे आंखें डालकर देखें और मेरी निर्दोष बहन को सम्मानपूर्वक वापस लाने की मांग करें’.
डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग की तारीफ, लेकिन उइगरों पर कुछ नहीं बोले. (फाइल फोटो)
वॉशिंगटन/बीजिंग. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है. बैठक के बाद वॉशिंगटन और बीजिंग की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में मानवाधिकार संबंधी चिंताओं, विशेष रूप से चीन पर उइगर समुदाय के खिलाफ कथित उत्पीड़न के आरोपों का कोई उल्लेख नहीं किया गया.
यह बात ऐसे समय सामने आई है जब ट्रंप ने शी जिनपिंग के लिए अपने बयानों में काफी नरमी दिखाई है और उन्हें हाल ही में अपना ‘दोस्त’ और ‘अच्छा इंसान’ बताया था.
ऑनलाइन मैगजीन ‘द डिप्लोमैट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उइगर एक्टिविस्ट रुशान अब्बास को उम्मीद थी कि पिछले महीने ट्रंप की बीजिंग यात्रा उनकी बहन गुलशन अब्बास की रिहाई के लिए एक बड़ा कदम साबित होगी. गुलशन अब्बास को चीन में लगभग आठ साल से कैद रखा गया है.
ट्रंप की बीजिंग यात्रा से कुछ दिन पहले अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने ऐसे प्रस्ताव पास किए थे, जिनमें राष्ट्रपति से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से हिरासत में लिए गए छह लोगों की रिहाई के लिए दबाव बनाने को कहा गया था. इनमें गुलशन अब्बास भी शामिल हैं.
अमेरिकी अखबार ‘द हिल’ में 14 मई को लिखे एक लेख में रुशान अब्बास ने कहा, “मैं दुनिया के सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक नेता से कह रही हूं कि वह एक तानाशाह की आंखों में देखकर मेरी बहन को वापस लाने की मांग करें.”
रिपोर्ट में कहा गया कि शी जिनपिंग के साथ ट्रंप की बैठकों से उइगर लोगों की लंबे समय से चली आ रही समस्या पर तुरंत कोई प्रगति नहीं हुई. न तो वॉशिंगटन और न ही बीजिंग ने यह बताया कि बातचीत में मानवाधिकारों का मुद्दा उठाया गया था.
कई उइगर लोगों ने ‘द डिप्लोमैट’ को बताया कि अब उनका भरोसा कम हो गया है कि अमेरिका में कोशिशों से कोई बड़ा बदलाव आएगा. वे चीन के शिनजियांग क्षेत्र में हिरासत में लिए गए या निगरानी में रखे गए अपने परिवार और दोस्तों की मदद के लिए दूसरे रास्ते तलाश रहे हैं.
33 वर्षीय एक्टिविस्ट सालिह हुदयार ने कहा, “तथ्य यह है कि ट्रंप ने चल रहे नरसंहार के बावजूद शी जिनपिंग से मुलाकात की, यह हमारे लिए सबसे बड़ा नुकसान है. शर्त यह होनी चाहिए थी कि ‘पहले आप इस नरसंहार को खत्म करें, फिर हमारे साथ बैठकर बात करें.’
रिपोर्ट में बताया गया कि 2017 से चीनी सरकार ने कथित तौर पर 10 लाख से ज्यादा तुर्किक जातीय समूहों के लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें ज्यादातर उइगर हैं. उइगर एक ज्यादातर मुस्लिम समुदाय है, जो चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग में रहते हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें




