Last Updated:
Alarm Health Effects: सुबह अलार्म की अचानक आवाज हमारे शरीर में फाइट एंड फ्लाइट रिस्पॉन्स को एक्टिव कर देती है, जिससे स्ट्रेस हार्मोन और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. अलार्म से शरीर की नेचुरल बायोलॉजिकल क्लॉक भी डिस्टर्ब हो जाती है. ऐसे में लोगों को बिना अलार्म के जागने के लिए स्लीप हाइजीन और सूरज की रोशनी जैसे विकल्प अपनाने चाहिए.
सुबह-सुबह अलार्म बजने से शरीर की नेचुरल क्लॉक डिस्टर्ब हो जाती है.
Side Effects of Morning Alarm: आजकल अधिकतर लोग सुबह जल्दी उठने के लिए अलार्म लगाते हैं. कुछ लोग घड़ी में अलार्म सेट करते हैं, तो कई लोग मोबाइल में अलार्म सेट करते हैं. सुबह सही टाइम पर उठने के लिए अलार्म लगाना हम सभी के रुटीन का हिस्सा बन चुका है. क्या आपने कभी सोचा है कि रोज अलार्म लगाने की आदत आपके दिल की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है? जी हां, कई रिसर्च में पता चला है कि अलार्म की अचानक आने वाली तेज आवाज हमारे शरीर और ब्लड प्रेशर पर नेगेटिव असर डालती है. यह आपके शरीर को उस समय डरा देता है, जब आप गहरी नींद में होते हैं. चलिए जानते हैं कि अलार्म लगाने की आदत सेहत के लिए क्यों हानिकारक है.
अलार्म की तेज आवाज शरीर में फाइट और फ्लाइट रिस्पॉन्स को एक्टिव कर देती है. इससे शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे तनाव हार्मोन का अचानक रिसाव होता है. हालांकि ये हार्मोन खतरों से निपटने के लिए जरूरी हैं, लेकिन शांत नींद से उठते समय इनका अचानक बढ़ना ठीक नहीं है. हार्मोन के इस उछाल से ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट अचानक बढ़ जाता है, जो लंबे समय में दिल की बीमारियों का जोखिम पैदा कर सकते हैं.
नींद हमारी भावनात्मक स्थिरता और मूड को कंट्रोल करने में बड़ी भूमिका निभाती है. अलार्म की वजह से बार-बार नींद का बीच में टूटना आपको चिड़चिड़ा, तनावग्रस्त और चिंतित बना सकता है. जब आपकी सुबह की शुरुआत ही घबराहट और हड़बड़ाहट के साथ होती है, तो इसका असर आपके पूरे दिन के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जो इनडायरेक्ट तरीके से आपके हार्ट हेल्थ को प्रभावित करता है.
बिना अलार्म के सही समय पर उठना पूरी तरह मुमकिन है, बस इसके लिए कुछ जीवनशैली में बदलाव की जरूरत है. हर रात सोने और सुबह जागने का एक ही समय तय करें. इससे आपकी आंतरिक घड़ी सेट हो जाएगी. सोने से पहले किताबें पढ़ना, गुनगुने पानी से नहाना या योग करना शरीर को संकेत देता है कि अब आराम का समय है. रोज रात में 7 से 9 घंटे की नींद जरूर लें. सुबह की रोशनी सर्केडियन रिदम को रेगुलेट करने में मदद करती है. रात को अपने कमरे के पर्दे खोल दें, ताकि सुबह सूरज की रोशनी अंदर आ सके. इससे आपकी नींद अपने आप खुल जाएगी. अलार्म की आदत छोड़कर प्राकृतिक रूप से जागने में थोड़ा समय लग सकता है. खुद पर धैर्य रखें और इस बदलाव को धीरे-धीरे अपनाएं.
About the Author

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें





