PM Modi Dinner Challenge For White House: पीएम मोदी का स्टेट डिनर बना व्हाइट हाउस के लिए चुनौती बिना लहसुन के बना खाना जिल बाइडेन ने बताई कहानी


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PMमोदी का स्टेट डिनर बना व्हाइट हाउस के लिए चुनौती, बिना लहसुन के परोसा खाना

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PM Modi State Dinner Jill Biden: अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला जिल बाइडेन ने अपनी किताब में जून, 2023 के पीएम मोदी के व्हाइट हाउस स्टेट डिनर का रोचक खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि शुरू में शाकाहारी मेन्यू पर्याप्त समझा गया था, लेकिन आखिरी समय में कई मेहमानों ने वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री व्यंजनों की मांग कर दी. किचन स्टाफ को हर प्लेट में बदलाव करने पड़े.

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पीएम मोदी का स्टेट डिनर बना था वॉशिंगटन के लिए चुनौती.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्हाइट हाउस स्टेट डिनर की दिलचस्प कहानी साझा की है. जिल बाइडेन लिखती हैं कि स्टेट डिनर की तैयारी कई महीनों की मेहनत का नतीजा होती है लेकिन आखिरी समय में अप्रत्याशित चुनौतियां सामने आ जाती हैं. भारत के स्टेट डिनर के मामले में भी यही हुआ. शुरू में सोचा गया था कि शाकाहारी मेन्यू पर्याप्त होगा, लेकिन आखिरी घंटों में कई मेहमानों ने वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री व्यंजनों की मांग कर दी.

किचन स्टाफ को हर प्लेट में बदलाव करने पड़े. जिल बाइडेन ने लिखा- ‘स्टाफ को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से डिश तैयार करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.’ यह घटना व्हाइट हाउस में आयोजित कई बड़े कार्यक्रमों में से एक थी, जहां हर छोटी-बड़ी बात पर गौर करना पड़ता है – फूलों की सजावट, मेन्यू, बैठने की व्यवस्था से लेकर मेहमानों की प्राथमिकताओं तक. बाइडेन ने व्हाइट हाउस की सोशल सेक्रेटरी कार्लोस एलिजोंडो की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे साल सैकड़ों कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संभाला.

आसान नहीं होते व्हाइट हाउस के ईवेंट

उन्होंने बताया कि व्हाइट हाउस में हर साल छोटे-बड़े सैकड़ों इवेंट होते हैं- सैन्य अधिकारियों की विदाई पार्टी से लेकर मेक-ए-विश बच्चों की मुलाकात और बड़े स्टेट डिनर तक. भारत के लिए स्टेट डिनर काफी बड़ा ईवेंट था लेकिन दोनों देशों के सांस्कृतिक अंतर की वजह से किचन स्टाफ को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से प्लेट्स बदलवानी पड़ी. स्टेट डिनर में सैकड़ों मेहमान फॉर्मल पोशाक में शामिल होते हैं. जिल बाइडेन ने खुलासा किया कि इतने सारे लोगों से हाथ मिलाने से उनकी कलाई में तेज दर्द होने लगा था. राहत के लिए उन्हें हाथ को बर्फ के पानी में डुबोना पड़ता था. यह तरकीब उन्हें हिलेरी क्लिंटन ने बताई थी. उन्होंने अपने पति राष्ट्रपति जो बाइडेन की भी मजाकिया अंदाज में चर्चा की. जिल लिखती हैं कि जो बाइडेन हर मेहमान से लंबी बातचीत करने लगते थे, जिसकी वजह से कार्यक्रम का समय बढ़ जाता था. कार्यक्रम को समय पर समाप्त करवाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी. मेहमानों को संभालना भी आसान नहीं होता.

भारत में सफेद कपड़े नहीं पहनकर जा सकते

कुछ लोग पूरे परिवार को लाने पर अड़ जाते हैं तो कुछ अपनी टेबल की स्टार पावर से खुश नहीं होते और सीटिंग अरेंजमेंट बदलवाने की कोशिश करते हैं. जिल बाइडेन ने लिखा कि ये पावर गेम्स मुझे हमेशा हैरान करते हैं. किताब में सांस्कृतिक संवेदनशीलता का भी जिक्र है. उन्होंने बताया कि अलग-अलग देशों के लिए कपड़े चुनते समय विशेष ध्यान रखा जाता है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत, चीन या जापान जैसे देशों के लिए सफेद रंग नहीं पहना जाता, क्योंकि वहां सफेद शोक का प्रतीक माना जाता है. स्टेट डिनर अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित कूटनीतिक मेजबानी मानी जाती है. इसका उद्देश्य विदेशी नेताओं का सम्मान करना और अमेरिकी मेहमाननवाजी को दुनिया के सामने पेश करना होता है. जिल बाइडेन की किताब न सिर्फ व्हाइट हाउस की आंतरिक तैयारियों का रोचक वर्णन करती है, बल्कि प्रोटोकॉल, सांस्कृतिक सम्मान और आखिरी समय की चुनौतियों की भी झलक दिखाती है.

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें



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