क्या इस जानलेवा कीड़े को अमेरिका में फैलने से रोका जा सकेगा?
यूएसडीए सेक्रेटरी ब्रुक रोलिंस ने बुधवार रात एक ब्रीफिंग में इसके बारे में जानकारी दी. रोलिंस ने कहा, ‘अगर हम सब मिलकर काम करें और एनिमल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का पालन करें तो यह परजीवी हमारे देश में जगह नहीं बना पाएगा’. रोलिंस ने इसे ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन का बड़ा प्रयास बताया है. उन्होंने कहा कि हमारी टीमों ने इस मक्खी को एक साल तक टेक्सास से दूर रखा जिससे हमें आज की तैयारी का वक्त मिल गया. आपको बता दें कि अमेरिका में दशकों पहले इस कीड़े को खत्म घोषित कर दिया गया था. यह बड़ी सफलता बांझ मक्खियों की ब्रीडिंग और अवेयरनेस कैंपेन के जरिए मिली थी. लेकिन साउथ अमेरिका में हाल ही में इसके मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं.
जानवरों के शरीर में आखिर कैसे पनपता है यह खौफनाक परजीवी?
स्क्रू-वर्म कोई छूत की बीमारी नहीं है जो एक जानवर से दूसरे में फैले. इसकी एडल्ट मादा मक्खियां गर्म खून वाले जानवरों के ताजे घावों में अपने अंडे देती हैं. अंडों से निकलने वाले लार्वा होस्ट के शरीर का जिंदा मांस खाते हैं. यह प्रक्रिया जानवरों के अहम अंगों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. इससे बहुत ही गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी हो सकता है. कुछ मामलों में यह इतना खतरनाक होता है कि होस्ट जानवर की तड़पकर मौत भी हो सकती है. यह वाइल्डलाइफ और पालतू जानवरों के लिए भी एक बड़ा खतरा है. टेक्सास और न्यू मैक्सिको के वेट्स को नए इन्फेक्शन को लेकर पूरी तरह अलर्ट रहने को कहा गया है. रोलिंस ने पालतू जानवरों के मालिकों से भी ज्यादा सावधानी बरतने की अपील की है.
क्या इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है स्क्रू-वर्म?
इंसानों में इसके मामले बहुत ही कम देखने को मिलते हैं. लेकिन अगर इन्फेक्शन हो जाए तो यह सीधा जानलेवा हो सकता है. अमेरिका में किसी इंसान में स्क्रू-वर्म का आखिरी मामला अगस्त में मैरीलैंड में मिला था. वह एक ट्रैवल से जुड़ा केस था और मरीज इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो गया था. ब्रुक रोलिंस ने बताया कि अभी इंसानों की सेहत को इससे बहुत कम खतरा है. इस परजीवी से फूड सेफ्टी का कोई बड़ा रिस्क नहीं है. लेकिन उन्होंने माना कि यह हमारे पशुधन के लिए एक बहुत ही गंभीर खतरा है. अगर पशुओं में यह बीमारी फैलती है तो हालात बेकाबू हो सकते हैं. इसलिए प्रशासन हर स्तर पर सुरक्षा को यकीनी बना रहा है.
किन लोगों को इस खतरनाक परजीवी से सबसे ज्यादा खतरा है?
ऐसे लोग जो पशुओं के साथ काम करते हैं उन्हें इसका सबसे ज्यादा खतरा है. जो लोग ज्यादातर समय बाहर बिताते हैं या बाहर सोते हैं उन्हें भी बहुत सावधान रहना चाहिए. जिन लोगों को कोई ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिससे खून बहता है वो आसानी से इन्फेक्शन का शिकार हो सकते हैं. शरीर पर खुले घाव वाले लोगों को इन मक्खियों से बचकर रहना चाहिए. यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने भी इसे लेकर अहम चेतावनी दी है. सीडीसी के मुताबिक खरोंच या कीड़े के काटने जैसा छोटा घाव भी इन मक्खियों को अपनी ओर खींच सकता है. अगस्त में ही जानवरों के इलाज के लिए इमरजेंसी दवाओं के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई थी. इस ट्रीटमेंट की एक खेप साउथ टेक्सास भेजी जा रही है.
इस आउटब्रेक को रोकने के लिए सरकार क्या सख्त कदम उठा रही है?
यूएसडीए ने सेंट्रल और साउथ अमेरिका में फैल रहे आउटब्रेक के जवाब में नए प्रोटोकॉल बनाए हैं. मई 2025 में ही एजेंसी ने दक्षिणी सीमा के जरिए जीवित जानवरों के इंपोर्ट पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी. यूएस-मेक्सिको बॉर्डर पर खास तरह के ट्रेंड कुत्तों को तैनात किया गया है. ये कुत्ते स्क्रू-वर्म को सूंघकर तुरंत उसकी पहचान कर सकते हैं. मेक्सिको और पनामा में बांझ मक्खियों का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए अमेरिकी टीमें भेजी गई हैं. अमेरिका ने टेक्सास में एक नई फैसिलिटी बनाने के लिए 75 करोड़ डॉलर का भारी-भरकम बजट रखा है. यहां हर हफ्ते करोड़ों की संख्या में बांझ मक्खियां तैयार की जाएंगी. यह नई फैसिलिटी अगले साल तक अपना काम शुरू कर देगी.
अमेरिका की इकोनॉमी को इस कीड़े से क्यों है अरबों का भारी खतरा?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह इन्फेस्टेशन अमेरिका के लिए बहुत बड़ी आर्थिक तबाही ला सकता है. देश में इसका सबसे बुरा आउटब्रेक साल 1972 में हुआ था. तब यूएसडीए के मुताबिक 90 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे. डलास के फेडरल रिजर्व बैंक ने इस खतरे को लेकर एक रिपोर्ट पेश की है. इसके अनुसार ऐसा ही आउटब्रेक दोबारा होने पर अकेले साउथवेस्ट इलाके को तीन अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैक्स स्कॉट ने इस विषय पर अहम रिसर्च की है. वे जेनेटिक मॉडिफिकेशन के जरिए मक्खियों को बांझ बनाने की तकनीक पर काम करते हैं. उनका कहना है कि इस बीमारी को फैक्ट्री में बांझ मक्खियां तैयार करके ही पूरी तरह से रोका जा सकता है.
पनामा-कोलंबिया बॉर्डर पर क्यों टूट गया इस बीमारी का मजबूत बैरियर?
मैक्स स्कॉट ने बताया कि 50 साल की लंबी मेहनत के बाद यूएसडीए ने इस मक्खी को पनामा-कोलंबिया बॉर्डर तक सीमित कर दिया था. लेकिन कुछ साल पहले यह मजबूत बैरियर अचानक फेल हो गया. इसके बाद ये खतरनाक मक्खियां सेंट्रल अमेरिका से होते हुए आज हमारे देश तक पहुंच गई हैं. स्कॉट के मुताबिक इसके पीछे कई छोटे-बड़े फैक्टर हो सकते हैं. हाल ही में बांझ नर मक्खियों का जो स्ट्रेन इस्तेमाल हुआ वह शायद उतना अच्छा और असरदार नहीं था. इसलिए मादा मक्खियों ने उन कमजोर बांझ नर मक्खियों के साथ मेटिंग करना छोड़ दिया. पनामा-कोलंबिया बॉर्डर पर माइग्रेंट्स की भारी भीड़ के साथ कुछ संक्रमित जानवर भी देश में आ गए होंगे. मक्खी खुद ज्यादा दूर नहीं उड़ती बल्कि संक्रमित जानवरों के शरीर पर ही अपना सफर तय करती है.