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NASA Mars Mission: नासा ने मंगल ग्रह के वातावरण का अध्ययन करने वाले अपने ऐतिहासिक MAVEN मिशन को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया है. दिसंबर 2025 में अंतरिक्ष यान से संपर्क टूट गया था. 2013 में लॉन्च हुआ यह मिशन सिर्फ एक साल के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन 11 साल से ज्यादा समय तक काम करता रहा.
मंगल ग्रह से जुड़ा मावेन मिशन खत्म.
NASA Mars Mission: लाल ग्रह मंगल के रहस्यों की परतें खोलने वाला नासा का ऐतिहासिक मिशन अब हमेशा के लिए खामोश हो गया है. मंगल के वातावरण का अध्ययन करने के लिए भेजा गया MAVEN (Mars Atmosphere and Volatile Evolution) अंतरिक्ष यान अब पृथ्वी से संपर्क नहीं कर पा रहा है और नासा ने आधिकारिक तौर पर मिशन समाप्त करने का फैसला कर लिया है. करीब 11 साल तक लगातार काम करने वाला यह मिशन मंगल ग्रह को समझने की दिशा में नासा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है.
मंगल के पीछे गया
नासा के मुताबिक MAVEN से आखिरी बार 6 दिसंबर 2025 को संपर्क हुआ था. उस समय अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह के पीछे से गुजर रहा था. इसके बाद अचानक उसका सिग्नल गायब हो गया और दोबारा संपर्क स्थापित नहीं हो सका. समस्या की जांच के लिए फरवरी 2026 में एक विशेष जांच बोर्ड बनाया गया था. कई महीनों की पड़ताल के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अंतरिक्ष यान को अब दोबारा सक्रिय करना संभव नहीं है.
1 साल के लिए भेजा था, 11 साल तक चला
MAVEN को 18 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था और 21 सितंबर 2014 को यह मंगल की कक्षा में पहुंचा था. दिलचस्प बात यह है कि इस मिशन को मूल रूप से सिर्फ एक साल के लिए डिजाइन किया गया था. लेकिन इसने अपनी तय उम्र से करीब 10 गुना ज्यादा समय तक काम किया और लगातार वैज्ञानिक डेटा भेजता रहा.
आखिर कैसे खत्म हुआ मिशन?
शुरुआती जांच में पता चला है कि मंगल के पीछे से गुजरने के बाद अंतरिक्ष यान अनियंत्रित रूप से तेजी से घूमने लगा. इससे उसकी दिशा और कक्षा दोनों प्रभावित हुईं. धीरे-धीरे बैटरियों की ऊर्जा खत्म हो गई और पावर सप्लाई बंद होने से संचार प्रणाली भी ठप पड़ गई. इसके बाद अंतरिक्ष यान पृथ्वी से संपर्क नहीं कर सका. नासा का कहना है कि असली तकनीकी कारणों की जांच अभी भी जारी है और विस्तृत रिपोर्ट इस साल के अंत तक जारी की जा सकती है.
मंगल को समझने में निभाई बड़ी भूमिका
MAVEN नासा का पहला मिशन था जिसका मुख्य उद्देश्य मंगल के वातावरण और उसके समय के साथ हुए बदलावों को समझना था. इस मिशन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि अरबों साल पहले मंगल पर मौजूद घना वातावरण और पानी आखिर कैसे खत्म हुआ और ग्रह आज इतना सूखा और ठंडा क्यों बन गया.
इंसानों की मदद कैसे करेगा ये मिशन?
नासा मुख्यालय में प्लैनेटरी साइंस डिवीजन की निदेशक लुईस प्रॉक्टर ने कहा कि MAVEN की ओर से जुटाई गई जानकारी भविष्य के मानव मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उनके मुताबिक इस मिशन ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की है कि मंगल पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को किस तरह के रेडिएशन खतरों का सामना करना पड़ सकता है और उनकी सुरक्षा के लिए क्या उपाय जरूरी होंगे.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें




