वाशिंगटन: अमेरिकी स्पेस फोर्स ने एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के साथ एक ऐतिहासिक डील की है. यह डील 4.16 बिलियन डॉलर की है. इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में सैटेलाइट का एक मजबूत नेटवर्क बनाना है. यह नेटवर्क हर पल हवाई खतरों पर नजर रख सकेगा. इस बड़े मिशन को स्पेस-बेस्ड एयरबॉर्न मूविंग टारगेट इंडिकेटर प्रोग्राम के तहत शुरू किया गया है. स्पेसएक्स इस प्रोग्राम के लिए चुनी गई पहली कंपनी है. ये सैटेलाइट क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे खतरों को ट्रैक करने में मदद करेंगे. अमेरिका का मानना है कि इससे उनके दुश्मन छिप नहीं पाएंगे. यह कदम अमेरिकी सेना को तकनीकी तौर पर दुनिया में सबसे आगे रखेगा. पहले सेना मुख्य रूप से निगरानी विमानों का उपयोग करती थी. अब स्पेस टेक्नोलॉजी इसमें एक बड़ा बदलाव लाने वाली है.
आखिर स्पेसएक्स का यह 4.16 बिलियन डॉलर का नया एसबी-एएमटीआई प्रोजेक्ट क्या है?
यह कॉन्ट्रैक्ट अमेरिकी सेना के ट्रैक और टारगेट सिस्टम का अहम हिस्सा है. एसबी-एएमटीआई का मतलब अंतरिक्ष आधारित सेंसर का एक जटिल नेटवर्क है. यह सिस्टम सुरक्षित कम्युनिकेशन और ग्राउंड डाटा प्रोसेसिंग को जोड़कर काम करता है. स्पेसएक्स इसके तहत सैटेलाइट्स का एक विशेष समूह विकसित करेगी.
ये सैटेलाइट धरती के किसी भी कोने में हवाई जहाजों और मिसाइलों का पता लगा सकेंगे. यह प्रोजेक्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम से जुड़ा है. यह सिस्टम अमेरिका को हवा और अंतरिक्ष दोनों स्तर पर सुरक्षित रखने के लिए बनाया जा रहा है. यह कॉन्ट्रैक्ट अंतरिक्ष रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी पहल है.
स्पेस फोर्स को सैटेलाइट के जरिए हवाई खतरों पर निगरानी रखने की जरूरत क्यों पड़ी?
लंबे समय से अमेरिकी सेना निगरानी के लिए ई-3 सेंट्री और ई-7 वेजेटेल जैसे विमानों का इस्तेमाल करती आई है. लेकिन दुश्मन अब बेहद आधुनिक एंटी-एक्सेस या एरिया-डिनायल सिस्टम बना रहे हैं. ये सिस्टम लड़ाकू विमानों को किसी भी क्षेत्र में घुसने से रोकते हैं. ऐसे खतरनाक इलाकों में निगरानी विमान भेजना सुरक्षित नहीं है. इस खतरे को कम करने के लिए ही अंतरिक्ष से निगरानी का फैसला लिया गया है. अंतरिक्ष से सैटेलाइट बिना किसी खतरे के दुश्मनों की हर हरकत को ट्रैक कर सकते हैं. स्पेस फोर्स के कर्नल रेयान फ्रेजियर ने कहा, ‘यह कदम खतरनाक एयरस्पेस में हमारे सैनिकों को लगातार सुरक्षा प्रदान करेगा’.
स्पेसएक्स के ये आधुनिक सैटेलाइट हवा में मौजूद टारगेट को कैसे ट्रैक करेंगे?
- यह पूरा सिस्टम कई तरह के एडवांस सेंसर्स पर आधारित होगा. ये सेंसर अंतरिक्ष से सीधे तौर पर हवा में उड़ते हुए टारगेट की लोकेशन कैप्चर करेंगे.
- इसके बाद इस डाटा को सुरक्षित कम्युनिकेशन लिंक के जरिए धरती पर भेजा जाएगा. धरती पर एआई तकनीक की मदद से इस डाटा का तुरंत एनालिसिस किया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया में जरा भी समय नहीं लगेगा.
- यह तकनीक अमेरिकी सेना को किसी भी संभावित हमले की जानकारी पहले ही दे देगी. इसके बावजूद पुराने विमान पूरी तरह से नहीं हटाए जाएंगे. नए सैटेलाइट सिस्टम और विमान एक-दूसरे के पूरक के तौर पर काम करेंगे.
स्पेस फोर्स का यह पावरफुल सैटेलाइट सिस्टम कब तक पूरी तरह से काम करने लगेगा?
स्पेस फोर्स ने इस प्रोजेक्ट के लिए बहुत तेजी से काम शुरू कर दिया है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह एसबी-एएमटीआई सैटेलाइट सिस्टम 2028 तक पूरी तरह से काम करना शुरू कर देगा. इसका मतलब है कि स्पेसएक्स को कड़े समय के भीतर काम पूरा करना है. सेना के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने में जुटे हैं.
यह नया ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम कहां और किस तरह से तैनात किया जाएगा?
यह सिस्टम किसी एक जगह पर नहीं बल्कि लो-अर्थ ऑर्बिट में तैनात होगा. ये सैटेलाइट पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाते हुए ग्लोबल कवरेज देंगे. अमेरिका इन्हें किसी भी विशेष युद्ध क्षेत्र पर केंद्रित कर सकता है. जहां भी अमेरिकी सेना को दुश्मनों के मिसाइल का खतरा महसूस होगा, वहां यह सिस्टम अलर्ट भेज देगा. इस प्रोजेक्ट का बजट लगातार बढ़ रहा है. गोल्डन डोम डिफेंस शील्ड का कुल खर्च अब 185 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है.




