गर्मी में दोपहर की झपकी लेने में शर्म आती है? ऐसा न सोचें, कार्डियोलॉजिस्ट ने बताए इसके फायदे


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Afternoon Nap in Summer: भीषण गर्मी के बीच कुछ लोगों को दोपहर में झपकी लेने की आदत होती है. हालांकि ऐसा करते हुए उन्हें शर्म भी आती है क्योंकि सबके सामने उन्हें नींद आ जाती है. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो इसमें अब शर्माने की बात नहीं है. कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि वास्तव में इससे फायदा ही होता है. डॉक्टर का कहना है कि 10 से 20 मिनट का नैप सेहत को कई तरह से फायदा दिलाता है. आइए इसके बारे में जानते हैं.

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दोपहर की झपकी.

Afternoon Nap in Summer: इस भीषण गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो जाता है. ऐसे में दोपहर के वक्त जैसे ही थोड़ी सी फुर्सत मिलती है और शरीर को थोड़ा आराम मिलता है तो तुरंत नींद लगने लगती है. यह नींद आमतौर पर झपकी होती है. लोग अगर दफ्तर में होते हैं या कई लोगों के साथ गप्पे लड़ाते हैं या कहीं इकट्ढे रहते हैं तो आमतौर पर झपकी लेने के कारण शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है लेकिन नींद इतनी तगड़ी आती है कि करे तो करे क्या. पर अब इसमें शर्मिंदगी या घबराने की कोई बात नहीं है. वास्तव में यह झपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है. यह बात हम नहीं बल्कि कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा कह रहे हैं. उन्होंने इसके कई फायदे बताए हैं.

दिमाग के लिए ताकतवर चीज है छोटी झपकी
डॉ. आलोक चोपड़ा दिल्ली के बड़े कार्डियोलॉजिस्ट हैं और उन्हें 40 साल से ज्यादा का अनुभव है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि दोपहर की छोटी झपकी लेना दिमाग और शरीर दोनों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है. उन्होंने कहा कि लोगों को दोपहर में थोड़ी देर सोने को लेकर गिल्ट महसूस नहीं करना चाहिए लेकिन यह झपकी लंबी नहीं बल्कि छोटी और सीमित समय की होनी चाहिए. डॉ. चोपड़ा ने बताया कि दिमाग के लिए सबसे ताकतवर चीजों में से एक है दोपहर की छोटी नींद लेना. लेकिन मैं लंबी और आलसी नींद की बात नहीं कर रहा हूं. मैं एक खास अवस्था की बात कर रहा हूं जिसे थीटा रिद्म कहा जाता है.

क्या है थीटा रिद्म
डॉ.आलोक चोपड़ा बताते हैं कि थीटा रिद्म ऐसी अवस्था होती है जिसमें व्यक्ति सोया हुआ भी होता है और हल्का जागरूक भी रहता है. अगर इस दौरान कोई आपका नाम पुकारे तो आप प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लेकिन दिमाग पहले ही गहरी रिकवरी मोड में पहुंच चुका होता है. उन्होंने बताया कि दोपहर करीब 2:30 बजे शरीर स्वाभाविक रूप से इस अवस्था में प्रवेश करता है. यह कोई संयोग नहीं बल्कि बॉडी क्लॉक का हिस्सा है. अक्सर लोग दोपहर में ऊर्जा कम होने को कमजोरी समझ लेते हैं जबकि वास्तव में शरीर उस समय आराम और रिकवरी की मांग कर रहा होता है.

दोपहर की झपकी के फायदे
डॉ.आलोक चोपड़ा का कहना है कि इस समय 15 से 20 मिनट की छोटी झपकी दिमाग के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है. इससे दिमाग तनाव की स्थिति से बाहर निकलकर रिपेयर, स्पष्ट सोच और बेहतर एकाग्रता की अवस्था में पहुंच जाता है. कई बार झपकी के बाद ऐसे समाधान और आइडिया भी मिल जाते हैं जो पहले समझ नहीं आ रहे थे.

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