TB cases in Delhi: देश कर राजधानी दिल्ली में टीबी विस्फोट हो गया है. दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में आए नतीजों से खलबली मच गई है. स्क्रीनिंग ड्राइव में महज डेढ़ महीने में 12,078 मामले सामने आए हैं.
दिल्ली की स्वास्थ्य विभाग ने 24 मार्च से 5 मई तक दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में टीबी स्क्रीनिंग ड्राइव चलाई थी, जिनमें कुल 12,078 मामले दर्ज किए हैं. यह अभियान अभी भी जारी है और संभावना है कि आगे टीबी मरीजों की और भी बड़ी संख्या सामने आ सकती है.
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत इतनी बड़ी संख्या में मिले टीबी मरीजों ने चिंता पैदा कर रही है और एक तरह की मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात बन गए हैं. इन मरीजों के कुल मामलों में 42 प्रतिशत यानी 5,073 मामले एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी (EPTB) के हैं, जो देश में सबसे अधिक अनुपातों में से एक है. यह फेफड़ों की टीबी है.
बच्चे भी टीबी के शिकार
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक ये टीबी के इन केसेज में सबसे ज्यादा खतरनाक आंकड़ा उन बच्चों का है जो टीबी के इलाज में दी जाने वाली दवाओं का पूरा उपयोग भी काफी मुश्किलों से करते हैं. इन आंकड़ों में बच्चों में टीबी के 1,323 मामले (11 प्रतिशत) सामने आए हैं जबकि व्यस्कों के 10,755 मामले (89 प्रतिशत) दर्ज किए गए.
लिंग के आधार पर 6,360 पुरुष (52.6%), 5,715 महिलाएं (47.3%) और तीन ट्रांसजेंडर व्यक्ति प्रभावित पाए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा, ‘देश में टीबी के मामले अभी भी मौजूद होना दुर्भाग्यपूर्ण है. इस कार्यक्रम के तहत हमने दिल्ली के सभी जिलों में 38 हाई-रिस्क वार्ड्स को कवर किया है, जिससे प्रभावित व्यक्तियों को तेजी से उपचार मिल सकेगा, संक्रमण का प्रसार रुकेगा और मृत्यु दर कम होगी.’
उन्होंने बताया कि जांच में पाए गए मरीजों को परिवार की स्क्रीनिंग सहित पेशेंट सपोर्ट सिस्टम भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
दिल्ली बन गया सबसे ज्यादा टीबी वाला राज्य
भारत टीबी प्रिवेलेंस सर्वे (2019-2021) के अनुसार दिल्ली देश में सबसे अधिक टीबी बोझ वाला राज्य है, जहां प्रति एक लाख लोगों में 747 मामले हैं और औसत संक्रमण दर 61 प्रतिशत है. सामान्य रूप से देशभर में EPTB के मामले 20-24 प्रतिशत होते हैं, लेकिन दिल्ली में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत पहुंच गया है. एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी फेफड़ों के अलावा लिम्फ नोड्स, हड्डियों, जोड़ों और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है.
इस टीबी की जांच है चुनौतीपूर्ण
इस टीबी की जांच चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इसमें फेफड़ों की बीमारी वाले सामान्य लक्षण नहीं दिखते और बायोप्सी या एडवांस्ड इमेजिंग जैसी आक्रामक प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ती है. हालांकि यह आमतौर पर कम संक्रामक होती है, लेकिन देरी से जांच होने पर मृत्यु दर बढ़ सकती है.
पड़ोसी राज्यों के भी मरीज
एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में EPTB रिपोर्टिंग अधिक होने का कारण यहां उपलब्ध उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीकें हैं. दिल्ली में पड़ोसी राज्यों से भी मरीज रेफर किए जाते हैं, इसलिए डायग्नोस्टिक लोड ज्यादा है.
इस ड्राइव में कुल 71,603 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 16.8 प्रतिशत पॉजिटिविटी दर रही. 984 आयुष्मान आरोग्य शिविरों के जरिए यह कार्य हुआ, जिनमें 224 हाई-रिस्क वार्ड्स में और 79 कांग्रिगेट सेटिंग्स में लगाए गए. कुल 64,764 चेस्ट एक्स-रे और 33,038 NAAT (मॉलेकुलर) टेस्ट किए गए.





