संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। यूएन चीफ के अलावा सिंगापुर के पीएम और यूरोप यूनियन की भी यही राय है।
सोशल मीडिया पोस्ट में गुटेरेस ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में अवरोध के कारण “ऊर्जा, परिवहन, विनिर्माण और खाद्य बाजार” प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था “दम तोड़ रही है।” उन्होंने मध्य-पूर्व संकट पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, “हर गुजरते घंटे के साथ हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।”
गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमें ऐसे समाधान चाहिए जो हमें इस खतरनाक स्थिति से वापस ले आएं।”
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग और यूरोपीय यूनियन ने भी इसे लेकर फिक्र जाहिर की है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने कहा है कि होर्मुज में बढ़ा तनाव अभी कम होता नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा अब इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस हालात से रूस को फायदा हो रहा है।
वहीं लॉरेंस वोंग ने चेतावनी दी कि ईरान पर युद्ध के कारण इस साल शहर-राज्य में आर्थिक विकास धीमा हो जाएगा। मई दिवस के मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि युद्ध के “जल्द खत्म होने” की उम्मीद नहीं है, और आने वाले महीनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है।
वोंग ने कहा, “हम पर इसका असर पड़ेगा क्योंकि हम खाड़ी से ऊर्जा और दूसरी जरूरी सप्लाई के लिए बहुत ज्यादा निर्भर हैं।”
उन्होंने आगाह किया कि दुनिया भर में, महंगाई बढ़ेगी। इसका असर एनर्जी से खाने और फिर दूसरी जरूरी चीजों पर पड़ेगा। कुछ देश मंदी झेल सकते हैं, और इसका सिंगापुर पर सीधा असर हो सकता है। वोंग ने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल भी जाता है, तो भी हालात तुरंत सामान्य नहीं होंगे।





