बेल से मिटेगा ब्रेस्ट कैंसर..! गर्मियों में मिलने वाला सुपरफूड, दवा बनाने में होगा उपयोग, वैज्ञानिकों का रिसर्च


पटना. देश में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. यह गंभीर बीमारी अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले रही है. इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए शोध में जुटे हुए हैं, ताकि सटीक इलाज खोजा जा सके. इसी दिशा में पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है.

शोध के दौरान गर्मियों में सुपर ड्रिंक माने जाने वाले बेल के गूदे में ऐसे तत्व पाए गए हैं, जो स्तन कैंसर को रोकने में सहायक हो सकते हैं. चूहों पर इसका परीक्षण भी किया गया. इससे पॉजिटिव रिजल्ट सामने आए हैं. इस महत्वपूर्ण शोध में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार की प्रमुख भूमिका रही है.

चूहों पर किया गया शोध
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनके शोध में यह सामने आया है कि बेल के पल्प में ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो कैंसररोधी प्रभाव रखते हैं. इस दावे की पुष्टि के लिए टीम ने चूहों पर प्रयोग किया. रिसर्च के दौरान चूहों को एक विशेष केमिकल दिया गया, जिससे करीब छह महीने में उनके स्तन में ट्यूमर विकसित हो गया.

इसके बाद चूहों को मिश्रित मात्रा में बेल का पल्प दिया गया. कुछ समय बाद यह देखा गया कि ट्यूमर का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा और कुछ दिनों बाद पूरी तरह समाप्त हो गया. इसके बाद चूहे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. इस शोध के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि बेल में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो कैंसर के इलाज में सहायक साबित हो सकते हैं. हालांकि, इस पर अभी और विस्तृत शोध और मानव परीक्षण की आवश्यकता है.

पेटेंट करने की तैयारी
उन्होंने आगे बताया कि अब उनकी टीम बेल के पल्प में मौजूद मॉलिक्यूल को अलग यानी आइसोलेट कर दोबारा चूहों पर परीक्षण करेगी. अगर इस चरण में भी पॉजिटिव परिणाम मिलते हैं, तो शोध को पेटेंट कराया जाएगा और प्रकाशित किया जाएगा. इसके बाद अगला चरण मानवों पर क्लीनिकल ट्रायल का होगा, ताकि इसके प्रभाव की विस्तृत जांच की जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे शोध में करीब तीन से चार साल का समय लगा है और प्रक्रिया अभी भी जारी है. इस महत्वपूर्ण अध्ययन को इंग्लैंड की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है.

सस्ती हो जाएंगी दवाएं
उन्होंने जानकारी दी कि शोध के अनुसार बेल के गूदे में कई प्रकार के फाइटोकेमिकल यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें कैरोटेनॉइड, फिनोलिक यौगिक, टैनिन, एल्कलॉइड, टरपेनॉइड, कूमरिन, स्टेरॉयड सैपोनिन, इनुलिन, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स और लिग्निन शामिल हैं. अध्ययन में पाया गया कि ये तत्व कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकते हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कैंसर की दवाएं काफी महंगी हैं. कुछ दवाएं हजारों रुपये की होती हैं, जबकि कई की कीमत लाखों तक पहुंच जाती है. ऐसे में अगर इस शोध से प्रभावी मॉलिक्यूल विकसित हो जाता है, तो ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की लागत कम हो सकती है और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img