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डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध के बीच अपनी मजबूत नेता की छवि बचाने और जिमी कार्टर जैसी विफलता से बचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार ट्रंप आंतरिक रूप से डरे हुए हैं कि यह संकट उनकी विरासत को खत्म कर सकता है. गैस की बढ़ती कीमतें, सैन्य नुकसान और सहयोगियों की कमी ने उनके तनाव को बढ़ा दिया है, जिससे उनके फैसले अब रणनीतिक होने के बजाय अस्थिर और अनिश्चित नजर आ रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ईरान में बुरी तरह फंस चुके हैं.
नई दिल्ली. ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच व्हाइट हाउस के गलियारों में एक खौफनाक साया मंडरा रहा है. दुनिया के सामने सीना तानकर खड़े होने वाले डोनाल्ड ट्रंप के जेहन में इन दिनों अपनी जीत के दावे नहीं बल्कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर की विफलता का काला अध्याय चल रहा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि आक्रामक दिखने वाले ट्रंप अंदर से बुरी तरह हिले हुए हैं. उन्हें डर है कि कहीं ईरान का यह भंवर उनकी राजनीतिक विरासत को उसी तरह न निगल जाए जैसे 1979 के होस्टेज क्राइसिस ने कार्टर की सत्ता को खाक कर दिया था. क्या इतिहास खुद को दोहराने वाला है? क्या ट्रंप उस चक्रव्यूह में फंस चुके हैं जिससे निकलने का रास्ता 46 साल पहले एक और राष्ट्रपति को नहीं मिला था?
ईरान संकट और ट्रंप की असुरक्षा
डोनाल्ड ट्रंप की वर्तमान स्थिति उनके सार्वजनिक बयानों और आंतरिक संघर्ष के बीच एक गहरी खाई को दर्शाती है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट यह साफ करती है कि ट्रंप जिस ‘मैक्सिमलिस्ट’ छवि का प्रदर्शन कर रहे हैं उसके पीछे 1979 के जिमी कार्टर जैसे पतन का डर छिपा है. कार्टर की विफलता का मुख्य कारण ईरान बंधक संकट के दौरान उनकी बेबसी थी जिसने उन्हें एक कमजोर राष्ट्रपति के रूप में स्थापित कर दिया था. आज ट्रंप भी खुद को उसी मोड़ पर खड़ा पा रहे हैं, जहां उनके सैन्य और राजनीतिक फैसले उनकी विरासत को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकते हैं.
ट्रंप का अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम को दरकिनार कर सोशल मीडिया के जरिए अल्टीमेटम देना और अचानक संघर्ष-विराम की घोषणा करना उनके अस्थिर नेतृत्व को उजागर करता है. यह व्यवहार रणनीतिक कौशल के बजाय हताशा और अनिश्चितता का संकेत है. गैस की बढ़ती कीमतें और कैथोलिक आधार का खिसकना उनके घरेलू राजनीतिक समीकरणों को बिगाड़ रहा है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप का यह आंतरिक तनाव केवल नीतिगत नहीं बल्कि व्यक्तिगत है. मार-ए-लागो में ड्रोन सुरक्षा के लिए किए गए सुरक्षा इंतजाम उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता को दिखाते हैं. यदि ट्रंप इस संकट को जल्द हल करने में विफल रहते हैं तो इतिहास उन्हें एक शक्तिशाली विजेता के बजाय एक ऐसे नेता के रूप में याद रख सकता है जो अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने बिखर गया. यह स्थिति न केवल उनकी अमेरिका फर्स्ट नीति को कमजोर कर रही है बल्कि उन्हें वैश्विक मंच पर अलग-थलग भी कर रही है.
जिमी कार्टर और 1979 का ईरान संकट
· क्रांति और शाह का पतन: 1979 की शुरुआत में ईरान के पश्चिम समर्थक शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को इस्लामी क्रांति के जरिए हटा दिया गया और अयातुल्ला खुमैनी सत्ता में आए.
· दूतावास पर कब्जा: जब कार्टर ने कैंसर से पीड़ित शाह को इलाज के लिए अमेरिका आने की अनुमति दी तो ईरानी छात्र भड़क गए. 4 नवंबर, 1979 को उन्होंने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया और 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया.
· ऑपरेशन ईगल क्लॉ कार्टर ने 24 अप्रैल 1980 को एक गुप्त बचाव अभियान शुरू किया जो एक बड़ी त्रासदी में बदल गया. ईरानी रेगिस्तान में एक हेलीकॉप्टर और परिवहन विमान की टक्कर में 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए. इस विफलता ने कार्टर को दुनिया के सामने लाचार दिखाया.
· राजनीतिक परिणाम: यह संकट 444 दिनों तक चला. मीडिया ने हर दिन ‘बंधक बनाए जाने के दिनों’ की गिनती दिखाई, जिससे जनता का कार्टर से भरोसा उठ गया. इसका सीधा फायदा रोनाल्ड रीगन को मिला, जिन्होंने 1980 का चुनाव जीता.[/ans]
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें





