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मोकामा के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह मतदान करने के लिए पहुंचे और वोट डालने के बाद फिर से जेल लौट गए. इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अब वे आगे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनका कहना था कि आने वाले समय में उनके बच्चे राजनीति में आगे बढ़ेंगे और चुनाव लड़ेंगे. सतह पर यह बयान साधारण लग सकता है, लेकिन राजनीति के जानकार इसे एक सोचा समझा सियासी दांव मान रहे हैं.
नीतीश कुमार के नाम पर बड़ा संकेत? अनंत सिंह बोले अब अगली पीढ़ी संभालेगी राजनीति
पटना. बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान के दिन एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला. बाहुबली नेता और पूर्व विधायक अनंत सिंह वोट डालने के लिए मतदान केंद्र पहुंचे और मतदान करने के बाद वे फिर से जेल लौट गए. लेकिन, इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने ऐसा बयान दिया जिससे बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है. अनंत सिंह ने स्पष्ट कहा कि अब वे आगे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनका कहना था कि अब राजनीति में अगली जिम्मेदारी उनके बच्चों को निभानी चाहिए. इस बयान को कई लोग उनके राजनीतिक करियर के नए मोड़ के रूप में देख रहे हैं.
हमेशा वफादार कहलाते रहेंगे अनंत सिंह!
दरअसल, अनंत सिंह पहले भी कई बार कह चुके थे कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे तो वे सक्रिय राजनीति से दूरी बना लेंगे. उस समय इसे सामान्य राजनीतिक बयान माना गया था. लेकिन अब जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जा रहे हैं, उसी समय अनंत सिंह ने अब आगे अपने चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी. ऐसे में इसे कई लोग उनके उस पुराने बयान को निभाने और खुद को नीतीश कुमार का वफादार साबित करने के रूप में देख रहे हैं. राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि इससे उन्होंने एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है.
अगली पीढ़ी के लिए राजनीति का रास्ता साफ
अनंत सिंह का यह बयान उनकी पारिवारिक राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उन्होंने साफ कहा कि अब उनके बच्चे चुनाव लड़ेंगे और राजनीति में आगे आएंगे. मोकामा क्षेत्र में लंबे समय से उनकी मजबूत पकड़ रही है. ऐसे में राजनीति से औपचारिक दूरी बनाकर उन्होंने अपने परिवार की अगली पीढ़ी के लिए रास्ता साफ कर दिया है. राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह फैसला उनके राजनीतिक प्रभाव को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि अब वह परोक्ष रूप से राजनीति में सक्रिय रह सकते हैं.
निशांत कुमार का नाम लेकर नया संकेत
मीडिया से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री पद को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार में मुख्यमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला पार्टी और गठबंधन के बड़े नेता करेंगे. फिर भी उनके इस बयान को राजनीतिक नजरिये से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में जातिगत समीकरण काफी प्रभावी माने जाते हैं. ऐसे में नीतीश कुमार का नाम लेते हुए निशांत कुमार के प्रति समर्थन जताकर उन्होंने अपने क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक राजनीति को साधने की कोशिश भी की है.
सम्मानजनक विदाई का अवसर बनाया
राजनीति में कई नेता ऐसे होते हैं जिन्हें सक्रिय राजनीति से हटते समय मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन अनंत सिंह का यह फैसला एक अलग तरह का राजनीतिक संदेश देता है. नीतीश कुमार के नाम के साथ अपना रिटायरमेंट घोषित करके उन्होंने अपने लिए एक सम्मानजनक विदाई का रास्ता तैयार किया है. राजनीति के जानकारों का कहना है कि इससे उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनती है जो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ज्यादा राजनीतिक निष्ठा को महत्व देता है.
नीतीश कुमार और अनंत सिंह का अनोखा संबंध
नीतीश कुमार और अनंत सिंह का राजनीतिक रिश्ता ‘सत्ता की मजबूरी’ और ‘बाहुबल’ के तालमेल का उदाहरण रहा है. इस रिश्ते की शुरुआत 2005 में हुई, जब नीतीश कुमार ने मोकामा के इस बाहुबली को जेडीयू में शामिल कर टिकट दिया और अनंत सिंह ने जीत के बाद कथित तौर पर नीतीश को सिक्कों से तौला था. साल 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और हत्या के एक मामले में गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह ने जेडीयू छोड़ दी.इसके बाद वे निर्दलीय और फिर आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीते, लेकिन 2024-25 के आसपास यह कड़वाहट फिर से नजदीकी में बदलती दिखी. हाल ही में 2025-26 के घटनाक्रमों में अनंत सिंह ने नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की है और उन्हें बिहार के लिए अनिवार्य बताया.
बिहार की राजनीति में नया उदाहरण
राज्यसभा चुनाव के बीच आया अनंत सिंह का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत घोषणा नहीं माना जा रहा. इसमें वफादारी का संदेश भी है, पारिवारिक राजनीति का संकेत भी और भविष्य की संभावनाओं की झलक भी. इसलिए बिहार की राजनीति में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल रिटायरमेंट का ऐलान है या फिर एक सोची समझी राजनीतिक रणनीति. फिलहाल इतना तय है कि अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के नाम के साथ जो सियासी दांव खेला है, उसने बिहार की राजनीति में नया उदाहरण प्रस्तुत किया है.
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