US-Iran War | Hormuz Strait Crisis | ‘ईरान का हाल बुरा, 52000 लोगों को मारा…’ डोनाल्ड ट्रंप का दावा, होर्मुज में 20 फीसदी फीस वसूलने की बताई वजह


अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि मंगलवार (भारतीय समयानुसार देर रात) से ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी (Maritime Blockade) दोबारा लागू कर दी जाएगी. इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं.

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग पूरी तरह खत्म कर दी गई है. उन्होंने कहा कि हाल ही में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था, लेकिन तेहरान ने उसे तुरंत तोड़ दिया. ट्रंप ने कहा, ‘हमने ईरान की सैन्य ताकत को तबाह कर दिया है. हम उन पर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं. उन्होंने समझौता किया और फिर खुद ही उससे पीछे हट गए. अब हम पीछे हटने वाले नहीं हैं.’ उन्होंने आगे दावा किया कि अमेरिकी सेना का अगला लक्ष्य होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना है. ट्रंप ने कहा कि अंततः अमेरिका पूरे हालात पर कंट्रोल स्थापित कर लेगा.

’52 हजार प्रदर्शनकारियों की हत्या’

ट्रंप ने ईरानी सरकार पर अपने ही नागरिकों के खिलाफ क्रूर कार्रवाई का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि अब तक 52 हजार प्रदर्शनकारियों की हत्या की जा चुकी है. हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक सबूत पेश नहीं किया. उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार अपने लोगों के साथ बेहद खराब व्यवहार कर रही है और दुनिया को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘…चार महीने पहले, वहां (ईरान में) महंगाई दर 5% थी. अब यह 350% से ज़्यादा है. उन्होंने एक समझौता किया; शायद 10 बार उसे तोड़ा, और बहुत से लोगों की जान ली. उन्होंने हमारे लोगों को मारा. लेकिन प्रदर्शनकारियों के साथ उन्होंने जो किया है… 52,000 (मौतें). क्या आपने कभी किसी का अंतिम संस्कार देखा है… उन्होंने 52,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला. मेरे कार्यकाल में वे ऐसा कुछ नहीं कर सकते. हमने उन्हें ऐसी स्थिति में ला दिया है कि उनके पास कोई सेना नहीं है. वे इसे लेकर कुछ नहीं कर सकते. उनके पास बस फेक न्यूज है… जो हमें युद्ध जीतने के बजाय हारते हुए देखना पसंद करते हैं, जो एक तरह से देशद्रोह है.’

ईरान पर लगातार तीसरी रात हमले

इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर ईरान के खिलाफ लगातार तीसरी रात सैन्य अभियान चलाया गया. अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों व नागरिकों पर हमले रोकना है.

फिर लागू होगी समुद्री नाकेबंदी

सेंटकॉम ने औपचारिक बयान जारी कर कहा कि 14 जुलाई शाम 4 बजे (अमेरिकी समय) से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले समुद्री यातायात की नाकेबंदी दोबारा लागू की जाएगी. अमेरिकी सेना उन जहाजों की निगरानी करेगी जो ईरान के बंदरगाहों तक पहुंचेंगे या वहां से निकलेंगे.

अमेरिकी सेना के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच लागू की गई होर्मुज स्ट्रेट की पहली नाकेबंदी के दौरान 140 से अधिक जहाजों का रुख बदला गया, नौ जहाजों को निष्क्रिय किया गया और मानवीय सहायता ले जा रहे 50 से ज्यादा जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई थी.

होर्मुज में वसूलेंगे 20% सुरक्षा फीस

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की थी कि अमेरिका अब खुद को ‘गार्जियन ऑफ द होर्मुज स्ट्रेट’ के रूप में स्थापित करेगा. उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी माल पर 20 प्रतिशत फीस लिया जाएगा. ट्रंप के मुताबिक, यह रकम क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए होगी.

ईरान की दो टूक चेतावनी

अमेरिका के इस कदम पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरानी सेना के केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोल्फाकरी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के संचालन में किसी भी तरह का अमेरिकी दखल कबूल नहीं किया जाएगा.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना ईरान की इजाजत के बिना किसी कारोबारी जहाज या तेल टैंकर की आवाजाही में दखल देती है तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा.

उधर, ट्रंप ने यह भी घोषणा की है कि वह 16 जुलाई की रात राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें ईरान संकट और अमेरिकी रणनीति पर विस्तार से जानकारी दे सकते हैं.



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