Study Abroad Country Selection Tips: विदेश में पढ़ाई के लिए सही देश कैसे चुनें? सिर्फ रैंकिंग नहीं, इन 5 बातों पर भी दें ध्यान


नई दिल्ली (Study Abroad Country Selection Tips). हर कोई विदेश जाकर पढ़ाई करने और ग्लोबल करियर बनाने का सपना देखता है. लेकिन एडमिशन की बात आते ही सही देश चुनना सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाता है. ज्यादातर स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स केवल इंटरनेट पर कॉलेजों की रैंकिंग देखते हैं या सोशल मीडिया और फिल्मों में बहुत मशहूर देशों को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन क्या किसी कॉलेज की ऊंची रैंकिंग देखकर आंख मूंदकर वहां चले जाना सही है?

विदेश में पढ़ाई करने का मतलब सिर्फ अच्छी डिग्री हासिल करना नहीं है. वहां के माहौल, रहने के खर्च और सबसे जरूरी- पढ़ाई पूरी होने के बाद वहां काम करने के मौके भी बहुत मायने रखते हैं. eduVelocity Global के फाउंडर विनू वॉरियर का मानना है कि विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने से पहले अपनी पसंद के देश की जमीनी हकीकत को अच्छी तरह समझना जरूरी है. केवल सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के बजाय कुछ बेहद प्रैक्टिकल पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए.

पढ़ाई के लिए सही देश कैसे चुनें?

अक्सर स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स चमक-दमक या सोशल मीडिया पॉपुलैरिटी के पीछे भागते हैं. उन्हें भीड़ के पीछे भागना सही लगता है. वे एजुकेशन एक्सपर्ट की सलाह लिए बिना कहीं पर भी एडमिशन का फैसला लेते हैं. फिर बाद में मनचाहा करियर नहीं बन पाने पर पछताते हैं. विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन से पहले जानिए 5 सबसे जरूरी फैक्टर्स, जिनसे आपका फ्यूचर सिक्योर हो सकता है.

1. केवल कॉलेज रैंकिंग के पीछे न भागें

कई बार स्टूडेंट्स वर्ल्ड रैंकिंग में ऊपर दिखने वाले कॉलेजों के चक्कर में पड़ जाते हैं. लेकिन आपको देखना चाहिए कि क्या वह कॉलेज और वहां का कोर्स आपके पर्सनल करियर गोल्स से मैच करता है? हो सकता है कि किसी कम रैंकिंग वाले कॉलेज में वही कोर्स ज्यादा बेहतर ढंग से पढ़ाया जाता हो. हमेशा अपनी रुचि और जरूरत के हिसाब से ही प्रोग्राम और कॉलेज का चयन करें, बजाय सिर्फ उसके नाम के पीछे भागने के.

2. अफवाहों और कहानियों पर नहीं, पक्के आंकड़ों पर करें भरोसा

सोशल मीडिया पर विदेश यात्रा और पढ़ाई को लेकर कई तरह की मनगढ़ंत कहानियां और अफवाहें चलती रहती हैं. किसी रिश्तेदार या दोस्त की सुनी-सुनाई बातों में आकर अपना भविष्य दांव पर न लगाएं. हमेशा सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट, यूनिवर्सिटी के ऑफिशियल पोर्टल और वेरिफाइड सोर्सेस से ही वीजा नियमों, रहने के खर्च और नौकरी की संभावनाओं की सही जानकारी इकट्ठा करें.

3. दुनिया को देखें, नए और उभरते देशों पर भी डालें नजर

जब भी विदेश में पढ़ाई की बात आती है तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले अमेरिका या ब्रिटेन का ख्याल आता है. लेकिन आज के समय में सोच का दायरा बढ़ाना जरूरी है. उदाहरण के लिए, अमेरिका में वीजा नियम कठिन हैं. जर्मनी, फिनलैंड, नीदरलैंड्स और आयरलैंड जैसे यूरोपीय देशों में न सिर्फ फीस बहुत कम है, बल्कि शानदार नौकरियां और करियर के बेहतरीन अवसर भी मौजूद हैं.

4. पढ़ाई के बाद जरूरी हैं नौकरी के अवसर को समझें

यह सबसे जरूरी पॉइंट है. डिग्री पूरी करने के बाद क्या उस देश में काम करने की इजाजत मिलेगी (Post Study Work Visa)? कई देशों में पढ़ाई पूरी होने के बाद 2-3 साल तक रुककर काम खोजने और नौकरी करने का वीजा मिलता है. देश चुनने से पहले यह जरूर चेक करें कि वहां पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की क्या शर्तें हैं और उस देश के मार्केट में आपके कोर्स से जुड़ी नौकरियां उपलब्ध हैं या नहीं.

5. बजट का गणित: ट्यूशन फीस के अलावा भी हैं कई खर्च

अक्सर स्टूडेंट्स सिर्फ कॉलेज की ट्यूशन फीस का हिसाब लगाकर विदेश चले जाते हैं. लेकिन असली चुनौती वहां पहुंचने के बाद शुरू होती है. रहने का किराया, खाना-पीना, ट्रैवल का खर्च, मेडिकल इंश्योरेंस और अन्य रोजमर्रा के खर्च बजट को काफी बढ़ा देते हैं. इसलिए ऐसा देश और शहर चुनें, जहां की लाइफस्टाइल बजट में फिट बैठती हो. इससे पढ़ाई के दौरान किसी तरह की आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा.



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