दरअसल, अमेरिका में हुए 11 सितंबर 2001 को हुए हमले (9/11 अटैक) के बाद से यूएस को संदेह था कि इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी है। हालांकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा। फिर अमेरिका ने पाकिस्तान में 2 मई 2011 को एक गुप्त ऑपरेशन के तहत आतंकी ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया।
हाल ही में पेंटागन के एक पूर्व अधिकारी ने भी यही बात कही थी कि ट्रंप सरकार में भले ही पाकिस्तान और अमेरिका के बीच नजदीकी बढ़ रही है, लेकिन दूसरी सरकार में पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जाएगा, ना ही मुनीर के किसी भी वादे को पूरा करने के लिए खुद को मजबूर पाएगा।
इसके अलावा, ईरान की तरफ से भी पाकिस्तान के मीडिएटर की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।





