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सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्राचार्य ने इस्तीफा दे दिया है. लंबे समय तक उतार-चढ़ाव और संघर्षों से गुजरने के बाद सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के पीछे के कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है, जिससे शिक्षा महकमे और विद्यालय से जुड़े लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
सिमुलतला आवासीय विद्यालय
जमुई. टॉपर्स की फैक्ट्री कहे जाने वाले सिमुलतला आवासीय विद्यालय को सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट भी कहा जाता है. हर साल इंटरमीडिएट और मैट्रिक की परीक्षा के बाद यहां से बड़ी संख्या में टॉपर निकलते हैं. रिजल्ट के बाद इस विद्यालय की खूब चर्चा भी होती है. लेकिन रिजल्ट से पहले ही यह विद्यालय अब चर्चा में आ गया है.
दरअसल, सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्राचार्य ने इस्तीफा दे दिया है. लंबे समय तक उतार-चढ़ाव और संघर्षों से गुजरने के बाद सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने शिक्षा विभाग के निदेशक को अपना त्यागपत्र भेजा है. हालांकि, 31 मार्च तक वह अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे. उनके अचानक त्यागपत्र देने के बाद अब यह विद्यालय चर्चा में आ गया है.
शैक्षणिक परिणाम हमेशा चर्चा में रहते हैं
हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे के कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है, जिससे शिक्षा महकमे और विद्यालय से जुड़े लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. गौरतलब है कि सिमुलतला आवासीय विद्यालय बिहार के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है और यहां के शैक्षणिक परिणाम हमेशा चर्चा में रहते हैं. बताते चलें कि मई 2024 में डॉ. राजीव रंजन पर अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितता और विभागीय एजेंसियों के साथ समन्वय में रुचि नहीं लेने जैसे आरोप लगे थे. इन आरोपों के आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था. हालांकि, बाद में हुई विस्तृत जांच में वे पूरी तरह आरोपमुक्त पाए गए. इसके बाद 17 अक्टूबर 2025 को उन्होंने दोबारा प्राचार्य के रूप में कार्यभार संभाला था. अपने ऊपर लगे आरोपों से मुक्त होने के बाद उन्होंने दुबारा अपना पदभार संभाला था, लेकिन अब इसी बीच उन्होंने अपना त्यागपत्र दे दिया है.
पिछले साल भी किया था बेहतर प्रदर्शन
विद्यालय के शैक्षणिक प्रदर्शन की बात करें तो सिमुलतला आवासीय विद्यालय लगातार बेहतर परिणाम देता रहा है. पिछले वर्ष 12वीं कक्षा में 95 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने सफलता हासिल की थी, जबकि 10वीं कक्षा में भी अधिकांश छात्र उच्च श्रेणी में उत्तीर्ण हुए थे. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संस्थान में नेतृत्व का स्थिर रहना बेहद जरूरी होता है. ऐसे में डॉ. राजीव रंजन का अचानक इस्तीफा विद्यालय के प्रशासन और भविष्य की रणनीति पर असर डाल सकता है. फिलहाल सभी की नजर शिक्षा विभाग के अगले फैसले पर टिकी हुई है.
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