when to wash curtains: हर कोई अपने घर को अपनी पसंद से सजाता है. तरह-तरह के डेकोरेटिव आइटम्स घर में रखता है. घर में आप अपनी पसंद के पर्दे भी डाइनिंग एरिया, लिविंग रूम, किचन या फिर वॉशरूम में लगाते होंगे. कई बार लोग घर के एक-एक कोने को हर सप्ताह साफ करते हैं. डेकोरेटिव आइटम्स पर पड़ी धूल-मिट्टी को पोछते होंगे, लेकिन अक्सर लोग पर्दों को साफ करना भूल जाते हैं. कुछ लोग तो ऐसे होते हैं, जो चार-पांच महीने पर्दे धोते ही नहीं. लोग सोचते हैं कौन पर्दे उतारे, फिर साफ करे और फिर उसे पूरे घर के पर्दे वाले रॉड में दोबारा लगाए. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपका ऐसा करना आपकी सेहत को किस तरह से नुकसान पहुंचा सकता है? जी हां, अगर आप पर्दों की रेगुलर साफ-सफाई नहीं करते हैं तो ये कई तरह से सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. चलिए जानते हैं यहां विस्तार से…
क्या घर के पर्दे भी कर सकते हैं बीमार?
अक्सर लोग घर के पर्दे की सफाई रेगुलर नहीं करते हैं, लेकिन ये पर्दे भी घर के वातावरण, हवा को प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि इनमें भी धूल-गंदगी, एलर्जन्स आदि लगातार चिपकते रहते हैं.
कितने दिनों पर साफ करने चाहिए पर्दे?
टीओआई में छपी एक खबर के अनुसार, पर्दे धोने का ऐसा कोई नियम-कानून नहीं है, लेकिन ऐसा भी न हो कि आप साल भर पर्दों को साफ ही ना करें. कई बार आप किस तरह के एरिया, वातावरण में रहते हैं, उसका भी असर पड़ता है. यदि आप बेहद साफ-सुथरे, शांत हरे-भरे इलाके में रहते हैं, तो ऐसे में पर्दों को 6 से 12 महीने के अंदर एक बार जरूर साफ करें. लेकिन, आपका घर बहुत धूल-मिट्टी, धुआं, रोड साइड है तो आपको पर्दों को जल्दी-जल्दी धोना जरूरी हो जाता है. इसे आप प्रत्येक तीन से छह महीने में जरूर साफ कर लें.
फैक्टर्स जो पर्दों को करते हैं गंदा
आपका घर कहां है, आसपास का वातावरण कैसा है, क्या बहुत अधिक धूल-मिट्टी हवा में उड़ती रहती है? यदि हां, तो ये फैक्टर पर्दों के धोने की फ्रीक्वेंसी को बढ़ा देते हैं. आपका घर रोड के किनारे है, दिन-रात प्रदूषण से परेशान रहते हैं, तो पर्दों पर लगातार ये धूल-मिट्टी, नुकसानदायक प्रदूषण के तत्व पर्दे पर चिपकते रहते हैं.
साथ ही आपके घर में पालतू जानवर जैसे कुत्ते, बिल्ली, खरगोश या कोई अन्य फरी एनिमल्स भी होंगे तो ये पर्दे के गंदा करते हैं. इन जानवरों के शरीर के फर, बाल टूटते रहते हैं और हवा में उड़ते रहते हैं, जो पर्दों पर भी जाकर चिपकते हैं. ऐसे में एक्सपर्ट भी ये सलाह देते हैं कि पर्दे को रेगुलर साफ करते रहना चाहिए, खासकर जब आपके घर में छोटे बच्चे हों.
बाथरूम, किचन, वॉशरूम में भी कुछ लोग पर्दे लगाना पसंद करते हैं, लेकिन किचन में लगातार खाना बनने से तेल, मसाले, चिकनाई, भोजन के कण हवा में फैलकर पर्दों पर चिपकते हैं. इससे कुछ समय बाद पर्दों का रंग तो बदल ही जाता है, अजीब सी स्मेल भी आने लगती है.
वहीं, बाथरूम, वॉशरूम के पर्दे भी आपको हर एक महीने पर जरूर साफ करना चाहिए, क्योंकि इन जगहों पर लगातार नमी बनी रहती है. नमी के कारण फफूंद, काई जम जाती है.
पर्दे कैसे पहुंचा सकते हैं सेहत को नुकसान?
पर्दों में परागकण, धूल के कण, पालतू जानवरों के फर, पालतू जानवरों की रूसी आदि जैसे एलर्जी पैदा करने वाले तत्व लगातार मौजूद रहते हैं, क्योंकि आप इन्हें रेगुलर साफ नहीं करते हैं. ऐसे में जिन लोगों को पहले से ही इन चीजों से एलर्जी है, स्किन समस्या है, सेंसेटिव स्किन है, अस्थमा आदि है तो ये गंदे पर्दे सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकते हैं.
पर्दे साफ करने के टिप्स
-पर्दों के फैब्रिक पर निर्भर करता है कि आप इसे ड्राई क्लीन कराएं या वॉशिंग मशीन में साफ करें.
– फैब्रिक को लंबे समय तक नया और अच्छा बनाए रखने के लिए आप इसे ठंडे पानी में साफ करें. इसके लिए हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें.
– पर्दे जब भी वॉशिंग मशीन में साफ करें तो उसमें ठूंस-ठूंस कर दूसरे कपड़े भी धोने के लिए न डालें. पर्दे अच्छी तरह से साफ होने के लिए मशीन में प्रॉपर स्पेस होनी चाहिए.
– पर्दे पर लगे दाग-धब्बे को छुड़ाने के लिए इसे पहले साबुन-सर्फ से बाल्टी में ही साफ करें, उसके बाद मशीन में डालकर धोएं. सूखने के लिए इन्हें प्रॉपर स्पेस दें, ताकि रिंकल्स न पड़ें और पर्दे बिल्कुल सीधे नजर आएं, ताकि आप दोबारा से इन्हें घर में लटका सकें.
-पर्दों की रेगुलर सफाई करके आप अपने घर के हाइजीन लेवल को बरकरार रख सकते हैं.





