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Maharajganj Sohgibarwa Wildlife Sanctuary: महराजगंज जिले की यह वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी कुल 42820.1 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है. उल्लेखनीय है कि इन जंगलों के भीतर कई गांव बसे हुए है. जिनकी जीवनशैली और आजीविका जंगलों से गहराई से जुड़ी हुई है. इस वजह से यहां आने वाले पर्यटकों को ग्रामीण जीवन को नजदीक से देखने और समझने का अवसर भी मिलता है. इतिहास पर नजर डालें तो शुरुआती दौर में यह क्षेत्र गोरखपुर फॉरेस्ट डिविजन के अधीन था.
महराजगंज: उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला देश की उत्तरी सीमा पर स्थित है और पड़ोसी देश नेपाल के साथ सीमा साझा करता है. वन संपदा से भरपूर इस जिले का बड़ा हिस्सा जंगलों से घिरा है जो पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. महराजगंज का नाम आते ही यहां स्थित सोहगीबरवा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी का जिक्र जरूर होता है जो अपने घने वन क्षेत्र और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है. यह जिला प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के कारण भी पहचान रखता है. नेपाल सीमा से सटी इस विस्तृत वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में विभिन्न तरह के वन्य जीव, पक्षी और प्राकृतिक सौंदर्य एक साथ देखने को मिलते है जो प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए इसे खास आकर्षण का केंद्र बनाते है.
सोहगीबरवा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी महराजगंज और कुशीनगर दोनों जिलों के बड़े क्षेत्र में फैली हुई है. यह महराजगंज जिले के चौक रेंज, मधुबनी रेंज, निचलौल रेंज और तराई क्षेत्र तक विस्तृत है. जहां तरह-तरह के वन्य जीव पाए जाते है. यहां पहुंचने वाले पर्यटक घने जंगल, हरियाली और शांत माहौल से खासा प्रभावित होते है.
खास है सैंक्चुअरी का इतिहास
महराजगंज जिले की यह वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी कुल 42820.1 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है. उल्लेखनीय है कि इन जंगलों के भीतर कई गांव बसे हुए है. जिनकी जीवनशैली और आजीविका जंगलों से गहराई से जुड़ी हुई है. इस वजह से यहां आने वाले पर्यटकों को ग्रामीण जीवन को नजदीक से देखने और समझने का अवसर भी मिलता है. इतिहास पर नजर डालें तो शुरुआती दौर में यह क्षेत्र गोरखपुर फॉरेस्ट डिविजन के अधीन था.
वर्ष 1978 में इसके प्रबंधन के लिए इसे अलग-अलग फॉरेस्ट डिविजनों में बांट दिया गया. लंबे समय तक यह गोरखपुर फॉरेस्ट डिविजन के उत्तरी क्षेत्र के रूप में संचालित होता रहा, लेकिन बाद में यहां वन्यजीवों की समृद्ध मौजूदगी और उनके महत्व को देखते हुए इसे वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के रूप में विकसित किया गया.
इस सैंक्चुअरी में हिरण, जंगली सूअर, नीलगाय, सियार, तेंदुआ समेत कई प्रकार के वन्य जीव पाए जाते हैं. पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह स्थान खास है, क्योंकि यहां प्रवासी पक्षियों की कई दुर्लभ और अनोखी प्रजातियां देखने को मिलती है.
शहर के शोर से दूर शांत माहौल
सोहगीबरवा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी भौगोलिक रूप से तराई क्षेत्र में स्थित है और नेपाल सीमा से लगी हुई है. यहां के घने जंगलों के बीच बहने वाली छोटी-छोटी नदियां वन्यजीवों के लिए जल का प्रमुख स्रोत है. सैंक्चुअरी में पर्यटकों की सुविधा के लिए जंगल सफारी की व्यवस्था की गई है, जिसके जरिए वे नजदीक से वन्यजीवों को देख सकते है. यहां न केवल वाइल्डलाइफ का अनुभव मिलता है, बल्कि आसपास बसे गांवों के जरिए ग्रामीण जीवन की झलक भी देखने को मिलती है. शहर के शोर-शराबे से दूर यह शांत और प्राकृतिक वातावरण लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता है.
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