Last Updated:
China-America Relation: ग्लोबल सिस्टम में लगातार परिवर्तन के साथ ही BRICS का महत्व बढ़ता जा रहा है. इसे अमेरिका की अगुआई वाली व्यवस्था का विकल्प माना जा रहा है. BRICS देशों की ओर से अलग से करंसी रोल-आउट करने पर भी चर्चा चल रही है. डोनाल्ड ट्रंप इसे डॉलर के खिलाफ मानते हैं. चीन ने उसी BRICS का सपोर्ट करने की बात कही है.
चीन ने BRICS को पूरा सपोर्ट देने की बात कही है. बीजिंग का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन में मौजूद हैं. (फोटो: Reuters)
China-America Relation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) की खुलकर तारीफ करते नजर आए हों, लेकिन वैश्विक कूटनीति के भीतर चीन अपनी अलग रणनीतिक चाल चल रहा है. भारत में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन की ओर से आया संदेश इसी दिशा की ओर अहम संकेत करता है. ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन का प्रतिनिधित्व पड़ोसी देश के भारत में राजदूत शू फेहांग (Xu Feihong) ने किया. चीन के विदेश मंत्री वांग यी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम की वजह से इस बैठक में शामिल नहीं हो सके. शू फेहांग ने BRICS बैठक में हिस्सा लेते हुए कहा कि BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है और चीन इस सहयोग को काफी महत्व देता है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन, भारत की अध्यक्षता में हो रही विदेश मंत्रियों की बैठक को सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है और ‘ग्रेटर BRICS’ सहयोग को आगे बढ़ाना चाहता है. बता दें ट्रंप चीन के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने शी जिनपिंग को महान नेता बताया है. वहीं, चीन अमेरिका के साथ ही गेम कर रहा है.
चीन की तरफ से दिया गया यह बयान सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि चीन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. एक तरफ अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और इंडो-पैसिफिक को लेकर प्रतिस्पर्धा जारी है, वहीं दूसरी ओर बीजिंग BRICS जैसे मंचों के जरिए वैश्विक दक्षिण (Global South) में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है. चीन को यह एहसास है कि भारत के बिना BRICS का प्रभाव सीमित रह जाएगा. यही वजह है कि सीमा विवाद और रणनीतिक मतभेदों के बावजूद बीजिंग लगातार भारत के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. चीन की यह नरम भाषा ऐसे समय आई है जब नई दिल्ली ने BRICS मंच पर आतंकवाद, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar Global Order) और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया है.
BRICS is an important platform for cooperation among emerging markets and developing countries. China attaches great importance to BRICS cooperation. We stand ready to support… pic.twitter.com/YmjTyyqUnK
अब BRICS के स्ट्रक्चर पर एक बार नजर डालते हैं. संगठन के मूल सदस्यों में भारत और दक्षिण अफ्रीका को छोड़ दें तो ब्राजील, रूस और चीन के साथ अमेरिका के संबंधों को पूरी दुनिया जानती है. ऐसे में स्वाभाविक है कि अमेरिका को यह संगठन फूटी आंख भी नहीं सुहाता है. BRICS के सदस्य देश वैकल्पिक मुद्रा यानी करंसी चलाने की योजना पर भी विचार कर रहे हैं. अमेरिका का मानना है कि BRICS की ओर से करंसी रोल-आउट करने का मतलब है डॉलर को सीधी चुनौती. डोनाल्ड ट्रंप इसकी कड़े शब्दों में मुखालफत कर चुके हैं. इसका एक और पहलू है. BRICS के ज्यादातर सदस्य बड़े बाजार हैं. जिन्हें न तो चीन और रूस एवं न ही अमेरिका खोना चाहता है. दूसरी तरफ, ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ती व्यापारिक सहमति अमेरिका के लिए खतरे की घंटी है. ट्रंप इस समय चीन में मौजूद हैं और ठीक उसी वक्त चीन द्वारा BRICS को मजबूत और बैठकों को सफल बनाने की बात अमेरिका के साथ रणनीतिक और सामरिक खेल से कतई कम नहीं है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स को अपने हितों के खिलाफ मानते हैं. (फोटो: Reuters)
About the Author

बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें





