NASA Psyche Mission, Mars Flyby | नासा के साइकी प्रोब ने मंगल को बनाया अपनी ‘गुलेल’, 20,000 KMPH की रफ्तार से एस्टेरॉयड की ओर बढ़ा!


Last Updated:

NASA Psyche Probe Mars Flyby Speed: नासा का साइकी स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह की मदद से अपनी रफ्तार बढ़ाने वाला है. 15 मई को यह प्रोब मंगल के बेहद करीब से गुजरेगा. इस दौरान मार्स का ग्रेविटेशनल पुल इसे एक गुलेल की तरह 20,000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से स्पेस में आगे धकेलेगा. इस खास दांव से ईंधन की बचत होगी और साइकी एस्टेरॉयड तक पहुंचने का रास्ता आसान हो जाएगा.

Zoom

मंगल की गुलेल से नासा का साइकी प्रोब भरेगा उड़ान! (Photo created with AI)

वाशिंगटन: नासा का साइकी (Psyche) मिशन अपने तीन साल के सफर के सबसे रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है. शुक्रवार 15 मई को यह प्रोब मंगल ग्रह की सतह से महज 4,500 किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा. आपको बता दें कि यह दूरी पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे कई सैटेलाइट्स की तुलना में भी काफी कम है. जब यह मार्स के पास से निकलेगा, तब इसकी रफ्तार लगभग 19,848 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. नासा इस दौरान मंगल के गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रेविटी का इस्तेमाल एक गुलेल की तरह करने वाला है. इससे स्पेसक्राफ्ट की दिशा बदलेगी और उसे आगे बढ़ने के लिए जबरदस्त रफ्तार भी मिलेगी.

मार्स की ग्रेविटी से कैसे मिलेगी साइकी को सुपर स्पीड?

स्पेस की भाषा में इस प्रक्रिया को ‘ग्रेविटी असिस्ट’ या ‘ग्रेविटी स्लिंगशॉट’ कहा जाता है. नासा 1970 के दशक से ही इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. इसमें किसी ग्रह के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल करके स्पेसक्राफ्ट को बिना अतिरिक्त ईंधन जलाए तेजी से आगे फेंका जाता है. साइकी स्पेसक्राफ्ट सोलर-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम पर चलता है, जिसमें जेनन गैस का उपयोग होता है. अगर नासा इसे सीधे एस्टेरॉयड तक भेजने के लिए ईंधन जलाता, तो मिशन बहुत महंगा और भारी हो जाता. मंगल की मदद लेकर नासा ने न सिर्फ ईंधन बचाया है, बल्कि 2029 में अपने टारगेट तक पहुंचने का रास्ता भी पक्का कर लिया है.

मंगल के पास से गुजरते समय क्या-क्या करेगा यह प्रोब?

यह मिशन सिर्फ रास्ते का शॉर्टकट ढूंढने के लिए नहीं है. नासा के वैज्ञानिकों ने इस मौके का पूरा फायदा उठाने की तैयारी कर ली है. जब साइकी मंगल के करीब होगा, तो इसके सभी वैज्ञानिक उपकरण चालू रहेंगे. यह प्रोब मंगल की हजारों तस्वीरें लेगा और ग्रह के चारों ओर मौजूद धूल के छल्लों की तलाश करेगा. इसके अलावा मंगल के मैग्नेटिक फील्ड और कॉस्मिक रेज के व्यवहार का भी एनालिसिस किया जाएगा. यह नजारा बेहद खास होगा क्योंकि साइकी मंगल के ‘नाइट साइड’ यानी अंधेरे वाले हिस्से की तरफ से प्रवेश करेगा. इस वजह से मंगल ग्रह पहले एक चमकते हुए पतले अर्धचंद्र (Crescent) की तरह दिखाई देगा.

एस्टेरॉयड साइकी में ऐसा क्या है जो वैज्ञानिक इतने उत्साहित हैं?

नासा के इस पूरे मिशन का असली मकसद मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद ‘साइकी’ नाम का एस्टेरॉयड है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एस्टेरॉयड किसी प्राचीन ग्रह का लोहे और निकल से बना कोर (Core) हो सकता है. करोड़ों साल पहले हिंसक टक्करों की वजह से उस ग्रह की बाहरी परतें नष्ट हो गई होंगी. इस एस्टेरॉयड की स्टडी करके वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि पृथ्वी जैसे पथरीले ग्रह आखिर कैसे बने. मिशन की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर लिंडी एल्किन्स-टैंटन का कहना है कि मंगल का यह फ्लाईबाय एस्टेरॉयड तक पहुंचने के लिए एक जरूरी मदद है. अगर इस दौरान हम मंगल का डेटा भी जुटा लेते हैं, तो यह हमारे लिए सोने पर सुहागा जैसा होगा.

क्या दूसरे रोवर्स भी करेंगे नासा की इस मिशन में मदद?

साइकी के इस मिशन में मंगल पर पहले से मौजूद नासा के दूसरे साथी भी साथ देंगे. मंगल की सतह पर मौजूद क्यूरियोसिटी और परसेवेरेंस रोवर के साथ-साथ मार्स रिकोनिसेंस ऑर्बिटर भी इस फ्लाईबाय पर नजर रखेंगे. ये सभी मिलकर डेटा जुटाने और तालमेल बिठाने में मदद करेंगे. जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी की सारा बेयरस्टो ने बताया कि फ्लाईबाय के लिए सब कुछ टारगेट पर है. कंप्यूटर को सभी जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं ताकि मई के महीने में यह ऑपरेशन बिना किसी गलती के पूरा हो सके.

About the Author

authorimg

दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें





Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img