पहाड़ों की गोद, नदी के बीच बसे हैं यह 4 सबसे प्रसिद्ध मंदिर, जहां उमड़ती है भारी भीड़, जानें रामपुर से कैसे पहुंचें


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पहाड़ों की ठंडी हवाएं, कलकल बहती नदियां और देवभूमि की असीम शांति… यदि आप रामपुर के शोर-शराबे से दूर आध्यात्मिक सुकून की तलाश में हैं, तो आपको कहीं दूर जाने की ज़रूरत नहीं है. रामपुर के आसपास कुछ ऐसे प्रसिद्ध और जाग्रत देव स्थान स्थित हैं, जहां आप महज कुछ घंटों का सफर तय कर न केवल शीश नवा सकते हैं, बल्कि प्रकृति की सुंदरता का आनंद भी ले सकते हैं. गर्जिया देवी के चट्टान पर बने मंदिर से लेकर नीम करोली बाबा के विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम तक, ये स्थान भक्तों के लिए आस्था के बड़े केंद्र हैं. आइए जानते हैं रामपुर के करीब स्थित इन प्रमुख धार्मिक स्थलों के बारे में…

गर्जिया देवी मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यता के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है. यह रामनगर से करीब 12 किलोमीटर दूर धिकाला रोड पर स्थित है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कोसी नदी के बीच एक ऊंची चट्टान पर बना है, जिसके कारण यह बाकी जगहों से अलग नजर आता है. नदी के बीच बने मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. रामपुर के लोग सुबह निकलकर शाम तक दर्शन करके आसानी से लौट सकते हैं. पहाड़ों और नदी के बीच बना यह मंदिर उन लोगों की पहली पसंद रहता है जो पास में किसी प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर जाना चाहते हैं.

हनुमान धाम

रामपुर से करीब 76 किलोमीटर दूर हनुमान धाम भगवान हनुमान के भक्तों के लिए खास जगह है. यहां बनी विशाल प्रतिमा दूर से ही दिखाई देती है. मंदिर परिसर में पहुंचते ही शांत माहौल महसूस होता है. मंगलवार और शनिवार को यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं. रामपुर के लोगों के लिए यह कम दूरी में पड़ने वाला प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां परिवार के साथ आसानी से पहुंचा जा सकता है और पहाड़ों क मजा भी लिया जा सकता है.

कैंची धाम

रामपुर से करीब 119 किलोमीटर दूर कैंची धाम देशभर में प्रसिद्ध है. नीम करोली बाबा का यह आश्रम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है. पहाड़ों के बीच बना यह स्थान शांति और आध्यात्मिक माहौल के लिए जाना जाता है. यहां पहुंचने वाले लोग बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं. रामपुर के लोग भी समय-समय पर यहां पहुंचते हैं. छुट्टियों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है.

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सड़क मार्ग

यह रामनगर शहर से करीब 7.5 किलोमीटर दूर स्थित है और रामपुर से यहां की दूरी लगभग 76 किलोमीटर पड़ती है. रामपुर से काशीपुर होते हुए सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. प्राइवेट वाहन या बस से रामनगर पहुंचकर वहां से टैक्सी लेकर मंदिर जाया जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ कुछ देर शांत वातावरण में बैठना पसंद करते हैं. पहाड़ों की ओर जाते रास्ते में पड़ने वाला यह स्थल आस्था का खास केंद्र है.

गार्जिया देवी

रामपुर से करीब 94 किलोमीटर दूर गार्जिया देवी रामपुर से करीब 94 किलोमीटर दूर गर्जिया देवी मंदिर कोसी नदी के बीच चट्टान पर बना है. यही वजह है कि यह मंदिर बाकी जगहों से अलग नजर आता है. यहां मां गिरिजा के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है. पहाड़ और नदी के बीच बना यह मंदिर रामपुर के श्रद्धालुओं के लिए नजदीकी धार्मिक स्थानों में शामिल है.

कैंची धाम

रामपुर से कैंची धाम पहुंचने के लिए लोग आमतौर पर रामनगर होते हुए नैनीताल रोड का रास्ता लेते हैं. यह स्थान नैनीताल से करीब 17 किलोमीटर पहले पहाड़ों के बीच स्थित है. सड़क मार्ग से सफर आसान रहता है और निजी वाहन से सीधे पहुंचा जा सकता है. नीम करोली बाबा का यह प्रसिद्ध आश्रम मुख्य सड़क के किनारे पड़ता है. इसलिए ढूंढने में परेशानी नहीं होती रामपुर से सुबह निकलने पर कुछ घंटों में पहुंचा जा सकता है और श्रद्धालु दर्शन कर उसी दिन लौट भी आते.

खास जगह

नैनीताल का नैना देवी मंदिर सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी खास आस्था का केंद्र है. यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी बेहद सुंदर है झील और पहाड़ों के बीच मां के दर्शन करने का अलग ही अनुभव मिलता है. रामपुर के लोग अक्सर वीकेंड या छुट्टी के दिन यहां दर्शन करने निकल जाते हैं.

नैना देवी

रामपुर से करीब 104 किलोमीटर दूर नैनीताल में स्थित नैना देवी मंदिर श्रद्धालुओं के बीच बेहद प्रसिद्ध है. नैनी झील के किनारे बना यह मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. मान्यता है कि मां नैना देवी के दर्शन से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. गर्मी और छुट्टियों में रामपुर से भी कई परिवार यहां पहुंचते हैं. पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर आस्था के साथ शांति का एहसास भी कराता है.



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