क्या डायबिटीज के मरीजों को फैटी लिवर का खतरा ज्यादा? आखिर इसमें कितनी हकीकत, डॉक्टर से समझिए


Last Updated:

Diabetes and Fatty Liver: डायबिटीज के मरीजों को फैटी लिवर डिजीज का खतरा ज्यादा होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो शरीर में इंसुलिन का सही इस्तेमाल न हो पाना ही लिवर में एक्स्ट्रा फैट जमा होने की सबसे बड़ी वजह है. फैटी लिवर की वजह से डायबिटीज को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता है. दोनों ही बीमारियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं.

Zoom

डॉक्टर की मानें तो इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण फैटी लिवर की समस्या पैदा हो सकती है.

Diabetes and Liver Diseases: लिवर में जब जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तब इसे फैटी लिवर कहा जाता है. आमतौर पर फैटी लिवर को शराब से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आज के दौर में नॉन अल्कोहॉलिक फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रही हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जब फैट लिवर के वजन के 5% से 10% से ज्यादा हो जाए, तो लिवर के लिए अपना काम करना मुश्किल हो जाता है. वैसे तो फैटी लिवर के कई कारण होते हैं, लेकिन डायबिटीज भी इसका एक रिस्क फैक्टर है. कई लोग मानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को फैटी लिवर का रिस्क ज्यादा होता है. क्या यह बात वाकई में सही है? चलिए इस बारे में लिवर के डॉक्टर से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं.

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रो एंड लिवर डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि टाइप 2 डायबिटीज के अधिकतर मरीज फैटी लिवर डिजीज का शिकार हो जाते हैं. टाइप 1 डायबिटीज के कुछ मरीजों में भी फैटी लिवर की समस्या देखी जाती है. डायबिटीज में फैटी लिवर होने की सबसे बड़ी वजह इंसुलिन रेजिस्टेंस है. डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है. इसकी वजह से खून में मौजूद शुगर सेल्स तक नहीं पहुंच पाती और शरीर में फैट का टूटना बढ़ जाता है. यह एक्स्ट्रा फैट खून के जरिए सीधा लिवर में पहुंचता है और वहां जमा होने लगता है. इससे बड़ी तादाद में डायबिटीज के मरीज फैटी लिवर का शिकार हो जाते हैं. हालांकि शुगर के मरीज फैटी लिवर से बचाव कर सकते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर अरोड़ा ने बताया कि डायबिटीज के अलावा भी कुछ चीजें फैटी लिवर के खतरे को बढ़ा देती हैं. पेट के आसपास जमी चर्बी लिवर के लिए सबसे बड़ी दुश्मन है. कोल्ड ड्रिंक, सोडा और पैकेज्ड शुगरी फूड्स में हाई फ्रुक्टोज होता है, जो सीधा लिवर में जाकर चर्बी बनाता है. इसके अलावा अगर आपका कोलेस्ट्रॉल हाई है या ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, तो लिवर पर दबाव दोगुना हो जाता है. इससे भी लिवर में फैट जमा होने लगता है और फैटी लिवर की कंडीशन पैदा हो जाती है.

एक्सपर्ट की मानें तो डायबिटीज और फैटी लिवर एक दूसरे जुड़ी समस्याएं हैं. अगर आपको डायबिटीज है, तो फैटी लिवर होने के चांस बढ़ जाते हैं. अगर फैटी लिवर हो गया है, तो इससे डायबिटीज का रिस्क बढ़ जाता है. फैटी लिवर की वजह से डायबिटीज के मरीजों के लिए शुगर लेवल कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. चिंता की बात यह है कि फैटी लिवर के शुरुआती स्टेज में लक्षण नहीं दिखते हैं, जिससे लोगों को इस परेशानी का पता देर से लगता है. अगर फैटी लिवर का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो लिवर में सूजन और फिर सिरोसिस जैसी घातक कंडीशन पैदा हो सकती है.

डॉक्टर के मुताबिक अगर आपको फैटी लिवर की समस्या है, तो सबसे पहले अपना वजन कम करें. अगर आप अपने कुल वजन का सिर्फ 7% से 10% भी कम कर लेते हैं, तो लिवर की चर्बी अपने आप कम होने लगती है. चीनी और प्रोसेस्ड फूड को ना कहें. सोडा, कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा मीठी चीजों से तौबा कर लें. दिन में कम से कम 30 मिनट की पैदल सैर या एक्सरसाइज इंसुलिन को बेहतर बनाती है, जिससे लिवर पर चर्बी नहीं जमती है. इसके अलावा अगर आपको डायबिटीज है, तो शुगर लेवल कंट्रोल करने की कोशिश करें. जितना डायबिटीज कंट्रोल में रहेगी, फैटी लिवर का रिस्क उतना ही कम होगा.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img