अदालत ने रिफंड का आदेश भी दिया
अदालत का फैसला फिलहाल केवल उन्हीं पक्षों पर लागू होगा जिन्होंने प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। जजों ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे पांच दिनों के भीतर आदेश का पालन करें और मामले में शामिल आयातकों को वसूली गई राशि वापस करें। हालांकि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे शुल्क फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी दायरे में शामिल नहीं हैं।
ट्रंप प्रशासन ने अपने फैसले का बचाव करते हुए अमेरिका के 1.2 ट्रिलियन डॉलर के वार्षिक वस्तु व्यापार घाटे और जीडीपी के 4% के बराबर चालू खाता घाटे का हवाला दिया था। प्रशासन का दावा था कि आर्थिक असंतुलन को नियंत्रित करने के लिए यह कदम जरूरी थे। लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कई अर्थशास्त्रियों और व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका किसी वास्तविक ‘पेमेंट संकट’ का सामना नहीं कर रहा, जिससे इन शुल्कों के खिलाफ कानूनी चुनौती मजबूत हो गई।





