अमेरिका को ये क्या हो गया? यूएस सेना में तैनात है बेटा, तब भी पंजाब की महिला को 24 घंटे से रखा भूखा-प्‍यासा


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अमेरिका को ये क्या हो गया? यूएस सेना में तैनात बेटा,पंजाबी महिला पर कहर ढाया

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अमेरिका में भारतीय मूल की महिला पर कहर ढाने का एक मामला सामने आया है. यह महिला चार दशक से भी अधिक समय से वहां रह रही थी. यूएस इमिग्रेशन एंड कस्‍म्‍स इनफोर्समेंट ( आईसीई) ने 17 मार्च को टेक्सास के वैली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था,

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1980 से अमेरिका में रह रही है महिला.

नई दिल्‍ली. ईरान-इजरायल अमेरिका के बीच यूएस में भारतीय मूल की महिला पर कहर ढाने का एक मामला सामने आया है. यह महिला चार दशक से भी अधिक समय से वहां रह रही थी. यूएस इमिग्रेशन एंड कस्‍म्‍स इनफोर्समेंट ( आईसीई) ने 17 मार्च को टेक्सास के वैली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था, जब वह एक इमिग्रेशन कोर्ट असाइनमेंट के लिए मिल्वौकी, विस्कॉन्सिन जा रही थीं. उसे वर्तमान में अमेरिका-मेक्सिको सीमा के पास रेमंडविले में एल वैले डिटेंशन सेंटर में रखा गया है.

53 साल की मीनू 1980 में अमेरिका चली गयी थी. तब से वहां पर रह रही हैं. मीनू बत्रा का सबसे छोटा बेटा हाल ही में अमेरिकी सेना में शामिल हुआ है और उसकी ओर से मानवीय पैरोल का अनुरोध किया है. वह चार बच्चों की अकेली मां भी हैं. सभी अमेरिकी नागरिक हैं. टेक्सास के दक्षिणी जिले के लिए अमेरिकी जिला अदालत में दायर याचिका के अनुसार मीनू बत्रा को हिरासत में लिए जाने के बाद लगभग 24 घंटे तक बिना भोजन या पानी के रखा गया था. उसके वकीलों का यह भी आरोप है कि दिसंबर 2025 में सर्जरी होने के बावजूद उसे चिकित्सा देखभाल नहीं मिल रही है. बाद में उसे हिरासत में सांस की बीमारी हो गई और उसने अस्थायी रूप से अपनी आवाज खो दी है.

पंजाबी, हिंदी और उर्दू बोलने वाली मीनू बत्रा ने अमेरिकी कानूनी को नेविगेट करने में अप्रवासियों की मदद की हैं. उन्होंने 20 से अधिक सालों तक अमेरिकी इमिग्रेशन अदालतों के साथ काम किया और टेक्सास में एक पेशेवर भाषा सेवाओं का करियर बनाया. उसकी इमिग्रेशन परेशानियां 2000 में जारी किए गए एक निष्कासन आदेश से शुरू हुई हैं. उसी समय एक इमिग्रेशन जज ने उन्हें ‘निष्कासन को रोकने’ का दर्जा दिया, जिसने अमेरिकी सरकार को उन्हें भारत निर्वासित करने से रोक दिया. क्योंकि उन्हें वहां उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है.

बताया जा रहा है कि मीनू बत्रा 1980 के दशक में अमेरिका आई थीं. 2002 से, वह लगुना हाइट्स, टेक्सास में रहती हैं, जहां उन्होंने एक लाइसेंस प्राप्त दुभाषिया के रूप में काम करना जारी रखा और अमेरिकन ट्रांसलेटर्स एसोसिएशन की सदस्य बन गईं. उसके वकीलों का तर्क है कि कोई आपराधिक इतिहास नहीं होने और लंबे समय से रहने के बाद उन्‍हें में हिरासत में लेना गैरकानूनी है. उन्होंने अदालत से उसकी तत्काल रिहाई का आदेश देने की मांग की है.

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें



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