स्टालिन ने तमिलनाडु में परिसीमन को बताया सत्ता हथियाने का प्रयास, कहा- इससे नहीं होगा सुधार


स्टालिन ने कहा कि इस तरह के बदलाव से संसद में उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा, जिससे दक्षिणी राज्यों की आवाज और प्रभाव कम हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे संघीय संरचना कमजोर हो सकती है और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।

स्टालिन ने तमिलनाडु में परिसीमन को बताया सत्ता हथियाने का प्रयास, कहा- इससे नहीं होगा सुधार

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए इसे वास्तविक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता को मजबूत करने का प्रयास बताया है। उन्होंने ने तमिलनाडु में परिसीमन को सत्ता हथियाने का प्रयास करार दिया। साथ ही उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया को महिला आरक्षण से जोड़ने के लिए भी केंद्र सरकार की आलोचना की है।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “परिसीमन की आड़ में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव बीजेपी के “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के नारे के विपरीत है। निर्वाचन क्षेत्रों का विस्तार करने से शासन में सुधार नहीं होगा, बल्कि इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अनुचित असंतुलन पैदा हो सकता है।”

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों को असमान रूप से नुकसान हो सकता है, जिन्होंने दशकों से जनसंख्या नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू किए हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से इन राज्यों को प्रभावी रूप से “दंडित” किया जाएगा, जबकि उच्च जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों, विशेष रूप से उत्तरी भारत के राज्यों को लाभ होगा।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने आगे चिंता व्यक्त की कि इस तरह के बदलाव से संसद में उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा, जिससे दक्षिणी राज्यों की आवाज और प्रभाव कम हो जाएगा। स्टालिन ने चेतावनी दी कि इससे भारत की संघीय संरचना कमजोर हो सकती है और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।

विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए स्टालिन ने परिसीमन प्रक्रिया से महिला आरक्षण को जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की। मुख्यमंत्री ने इस जुड़ाव को राजनीतिक रूप से प्रेरित और अनावश्यक बताया और जोर दिया कि महिला आरक्षण को मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर बिना देरी किए लागू किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने सामाजिक न्याय के मुद्दों, विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व की कमी पर भी चिंता जताई। मुख्यमंत्री स्टालिन ने जाति-आधारित जनगणना की मांग को दोहराते हुए कहा कि ऐसे उपायों की अनदेखी से समान प्रतिनिधित्व और नीति निर्माण कमजोर होता है। स्टालिन ने बताया कि भारत की आर्थिक प्रगति के बावजूद ओबीसी में क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आय सीमा कई वर्षों से 8 लाख रुपए पर अपरिवर्तित बनी हुई है।




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